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Jaisalmer News: जसोलधाम में वैशाख शुक्ल त्रयोदशी पर उमड़ी भीड़, भीषण गर्मी में भी नहीं रुकी भक्ति की लहर

Sun, 11 May 2025 06:18 PM IST
जैसलमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर

सार

विभिन्न देवालयों में आराधना और दीप सज्जा से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। बालोतरा के खंडेलवाल परिवार द्वारा छप्पन भोग का भव्य आयोजन किया गया, जिसे माता को अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। 
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जसोलधाम में उमड़ा श्रद्धा का महासागर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के ऐतिहासिक मरुस्थलीय अंचल में स्थित पवित्र जसोलधाम में वैशाख शुक्ल त्रयोदशी के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और दिव्यता का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। यहां स्थित श्रद्धा और आस्था की प्रतीक माता श्री राणीसा भटियाणीसा के दरबार में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दिव्य दर्शन लाभ प्राप्त किया। यह अवसर न केवल धार्मिक भावनाओं का विस्फोट था, बल्कि सेवा, अनुशासन और सामाजिक समर्पण की मिसाल भी बन गया।
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भोर होते ही उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
सुबह की पहली किरण फूटने से पहले ही श्रद्धालुओं का कारवां जसोलधाम की ओर उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए रात से ही कतारें लगने लगी थीं। श्रद्धालु महिलाएं, पुरुष, युवा, वृद्ध और बच्चे सभी माता के जयकारों के साथ भावविभोर होकर पंक्तिबद्ध होकर दर्शन के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे। मंदिर प्रबंधन द्वारा सुंदर पुष्प सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक झालरों से पूरे परिसर को उत्सवमय रूप प्रदान किया गया, जिसने श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक अनुभूति को और भी प्रबल कर दिया।

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मंगला आरती और वैदिक पूजा-अर्चना ने दिलाई दिव्यता की अनुभूति
सुबह की मंगला आरती में हजारों भक्तों ने एक साथ हिस्सा लिया। जैसे ही घंटे-घड़ियालों की गूंज और शंखनाद के साथ आरती आरंभ हुई, वातावरण में एक विशेष प्रकार की आध्यात्मिक तरंग फैल गई। इसके पश्चात् वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ माता श्री राणीसा भटियाणीसा की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर स्थित अन्य पवित्र देवालयों श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भेरूजी में भी भक्ति और आराधना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हर मंदिर में दीपों की रोशनी और भक्तों की आंखों में श्रद्धा की चमक एक भावनात्मक वातावरण का निर्माण कर रही थी।

छप्पन भोग का भव्य आयोजन
इस पवित्र पर्व पर बालोतरा के प्रतिष्ठित खंडेलवाल परिवार, मुकेश कुमार नंदकिशोर खंडेलवाल द्वारा माता राणीसा के चरणों में भव्य छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसमें देशी-विदेशी व्यंजनों, पारंपरिक मिष्ठानों और ताजे फलों का विशाल प्रसाद तैयार किया गया। इस दिव्य भोग को न केवल माता के श्रीविग्रह को अर्पित किया गया, बल्कि समस्त मंदिरों में भी अर्पित कर श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। प्रसाद वितरण व्यवस्था में युवाओं की टोली, सेवादारों, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य और महिला मंडल की सक्रिय भागीदारी रही। श्रद्धालुओं ने यह प्रसाद बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ ग्रहण किया, जिससे उन्हें दिव्य आनंद की अनुभूति हुई।

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रावलगढ़ से रावल किशन सिंह जसोल द्वारा भोग थाल अर्पण
विशेष अवसर पर रावलगढ़ जसोल के अधिपति रावल किशन सिंह ने पारंपरिक रीति से भोग का थाल लेकर माता राणीसा को अर्पण किया। यह भोग श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री कल्याण सिंह जी एवं मंदिर परिसर स्थित समस्त देवस्थलों को अर्पित किया गया। इस मौके पर रावल साहब ने संपूर्ण राष्ट्र की सुख-शांति, समृद्धि और उन्नति के लिए मंगलकामनाएं कीं तथा राष्ट्र विरोधी शक्तियों के विनाश हेतु मां जसोल से विशेष प्रार्थना की।
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भीषण गर्मी में भी भक्ति का जोश बरकरार, प्रबंधन ने किए अनुकरणीय इंतजाम
मई की भीषण गर्मी को देखते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रदालुओं की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएं की गईं। पूरे परिसर में छायादार टेंट, पंखे, एयर कूलर, जलधाराएं (फव्वारे), पीने के ठंडे पानी की मशीनें और विश्राम स्थल बनाए गए। सेवादार लगातार जल सेवा, दिशा-निर्देशन और अनुशासन बनाए रखने में जुटे रहे। इस सुव्यवस्थित प्रबंधन की हर कोई प्रशंसा करता नजर आया।



मां जसोल के चरणों में झुकी आस्था, प्रेरणा बना आयोजन
यह त्रयोदशी महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह आत्मा को झंकृत कर देने वाली दिव्यता, अनुशासन और समाज सेवा की प्रेरणादायक मिसाल बन गया। पूरे दिन मंदिर प्रांगण में भजन, कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और चंग की धुन पर झूमते श्रद्धालु यह संदेश देते नजर आए कि मां जसोल का यह पावन धाम जीवन के हर मोड़ पर आस्था, शक्ति और शांति का साक्षात स्रोत है।
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