सैलानियों से गुलजार हुआ जैसलमेर शहर
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जैसलमेर की तपती रेत, धूल भरी हवाएं और अनंत फैलाव वाला रेगिस्तान अब सैलानियों की रौनक से सराबोर है। देशी-विदेशी पर्यटकों की आमद से शहर की शामें रंगीन और रातें संगीतमय हो गई हैं। गुलाबी ठंड के साथ यहां की लोक संस्कृति का जादू चरम पर है।
मांगनियारों की धुनों ने बढ़ाई गुलाबी ठंड की खूबसूरती
गढ़ीसर झील के किनारे डूबते सूरज के साथ जब मांगनियार कलाकार हारमोनियम पर सुर जगाते हैं और ‘केसरिया बालम’ गूंजता है, तो माहौल और भी रूमानी हो उठता है। लोक धुनों पर झूमते पर्यटक जैसलमेर की इस अनोखी शाम को यादगार बना रहे हैं।
दीपावली के बाद पर्यटन सीजन की शुरुआत, 6 लाख से अधिक सैलानी पहुंचे
पर्यटन सीजन की औपचारिक शुरुआत दीपावली बाद से मानी जाती है। रामा-श्यामा के अवसर पर गुजरात से आने वाले सैलानियों का प्रवाह यहां बड़ी संख्या में देखने को मिलता है। इसी सीजन में अब तक 6 लाख से अधिक पर्यटक जैसलमेर घूमने आ चुके हैं।
ऐतिहासिक और भूतिया किस्सों से जुड़े स्थल भी आकर्षण का केंद्र
जैसलमेर में सोनार किला, गढ़ीसर झील, चारबाग छतरियां, कुलधरा गांव और वॉर म्यूजियम प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। इनमें कुलधरा गांव अपनी रहस्यमयी और भूतिया कहानियों के कारण पर्यटकों की खास रुचि का केंद्र बना हुआ है।
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सम के धोरों की सफारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अलग ही आकर्षण
रेतीले धोरों पर सफारी, टेंटों में बीतने वाली मखमली रातें, लोक संगीत और कालबेलियों का नृत्य सैलानियों को बार-बार जैसलमेर खींच लाते हैं। सैलानियों की भीड़ का सबसे बड़ा आकर्षण यही सम का इलाका है, जहां हर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अलग ही रंग जमता है।
भाजपा की सरकार आने पर सम से खुडी की ओर पर्यटन को मोड़ने की पहल की जाती रही है। इस बार भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने योग दिवस का आयोजन खुडी में करते हुए पर्यटन को नई दिशा देने का प्रयास किया।