उत्तर पश्चिम रेलवे ने ट्रेनों के संचालन में तकनीकी और पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जैसलमेर-जयपुर-जैसलमेर लीलण एक्सप्रेस और अजमेर-दौंड-अजमेर स्पेशल रेल सेवाओं को अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव न केवल रेलवे के आधुनिकीकरण को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और यात्रियों की सुविधा के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, गाड़ी संख्या 12467/12468 लीलण एक्सप्रेस जयपुर से 1 अप्रैल 2026 और जैसलमेर से 3 अप्रैल 2026 से इलेक्ट्रिक इंजन के साथ संचालित होगी। इसी तरह, गाड़ी संख्या 09625/09626 अजमेर-दौंड-अजमेर स्पेशल ट्रेन अजमेर से 2 अप्रैल 2026 और दौंड से 3 अप्रैल 2026 से इलेक्ट्रिक इंजन के जरिए चलाई जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम पर्यावरण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। डीजल इंजन की तुलना में इलेक्ट्रिक इंजन से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे प्रदूषण घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान समय में जब जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती बन चुका है, ऐसे में रेलवे का यह प्रयास सराहनीय माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों के संचालन का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा। इससे यात्रा अधिक स्मूद और कम झटकों वाली होगी। साथ ही, इंजन बदलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रेनों का ठहराव समय कम होगा, जिससे यात्रा समय में भी सुधार होने की संभावना है। यात्रियों को अब पहले की तुलना में तेज, शांत और अधिक आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।
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रेलवे को भी होगा आर्थिक लाभ
डीजल की खपत कम होने से रेलवे के खर्चों में भी कमी आएगी, जिससे राजस्व की बचत होगी। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक इंजन का रखरखाव भी अपेक्षाकृत आसान और किफायती होता है। इस कदम से रेलवे की संचालन क्षमता में भी वृद्धि होगी और ट्रेनों का संचालन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
उत्तर पश्चिम रेलवे लगातार अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और सुविधाओं में सुधार करने की दिशा में कार्य कर रहा है। ट्रेनों का विद्युतीकरण इसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे भविष्य में और भी ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित करने की योजना है। रेलवे के इस निर्णय से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।