बालोतरा जिले के सिवाना फांटे के समीप निर्माणाधीन बालोतरा जिला न्यायालय परिसर की निर्माण गुणवत्ता को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। भवन निर्माण में कथित तकनीकी खामियों और निर्माण मानकों के पालन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूरे मामले की तकनीकी जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के तकनीकी विशेषज्ञों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और संबंधित पक्षों को शामिल करते हुए संयुक्त टीम गठित की है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीम को निर्माणाधीन कोर्ट कॉम्प्लेक्स का मौके पर जाकर निरीक्षण करने तथा भवन की गुणवत्ता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस आदेश के बाद अब निर्माणाधीन न्यायालय भवन की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और निर्माण प्रक्रिया में अपनाए गए तकनीकी मानकों की जांच विशेषज्ञों की निगरानी में होगी।
जनहित याचिका में उठाए गए निर्माण गुणवत्ता के सवाल
याचिका के अनुसार, यह निर्माण सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में ठेकेदार फर्म मो. अयूब कंस्ट्रक्शन कंपनी, बीकानेर की ओर से किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने निर्माण कार्य में जी-शेड्यूल और भवन निर्माण से संबंधित निर्धारित मानकों के अनुपालन पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इन सभी बिंदुओं को फिलहाल याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के रूप में देखा जा रहा है। इनकी वास्तविक स्थिति का निर्धारण अब हाईकोर्ट के निर्देश पर होने वाली तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
RCC से लेकर बीम-कॉलम तक कई बिंदुओं पर आपत्ति
याचिका में भवन के अलग-अलग हिस्सों की निर्माण गुणवत्ता को लेकर कई तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इनमें आरसीसी स्ट्रक्चर में हनीकॉम्बिंग यानी कंक्रीट के भीतर खाली या छिद्रयुक्त हिस्से, बीम और कॉलम के जॉइंट की मजबूती, कंक्रीट कास्टिंग की गुणवत्ता तथा अन्य संरचनात्मक पहलुओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का दावा है कि भवन के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य अपेक्षित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं दिखाई देता। इसके अलावा सीढ़ियों की मजबूती, दरवाजों और खिड़कियों के लिंटल, ईंट-पत्थर के काम तथा प्लास्टर की गुणवत्ता पर भी आपत्ति जताई गई है। भवन में दिखाई देने वाले सफेद क्षार जैसे निशानों, फिनिशिंग की गुणवत्ता और निर्माण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर भी याचिका में चिंता जाहिर की गई है।
बिजली-पानी की लाइन के लिए बाद में तोड़फोड़ का भी आरोप
अब हाईकोर्ट की ओर से गठित विशेषज्ञ टीम यह देखेगी कि भवन निर्माण के दौरान विद्युत, जल और अन्य सेवाओं के लिए आवश्यक प्रावधान पहले से तकनीकी डिजाइन में किए गए थे या बाद में संरचना में बदलाव किए गए। इससे भवन की दीर्घकालिक मजबूती पर किसी तरह का असर पड़ता है या नहीं, यह भी तकनीकी परीक्षण का हिस्सा रहेगा।
आईआईटी जोधपुर के विशेषज्ञ करेंगे तकनीकी मूल्यांकन
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया में IIT जोधपुर के तकनीकी विशेषज्ञ अभियंता को शामिल किया है। अदालत की ओर से गठित संयुक्त टीम में संजय माथुर, अधीक्षण अभियंता, IIT जोधपुर के तकनीकी विशेषज्ञ अभियंता, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार, अधिवक्ता तीर्थराज सिंह सोढा तथा बालोतरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को शामिल किया गया है।
इस तरह जांच केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी इसमें शामिल होगी। टीम मौके पर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेगी और उपलब्ध निर्माण मानकों तथा निर्धारित तकनीकी प्रावधानों के साथ उसका मिलान करेगी।
मौके पर निरीक्षण के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
हाईकोर्ट ने जांच दल को निर्देश दिए हैं कि वह निर्माणाधीन भवन का विस्तृत निरीक्षण करे। निरीक्षण के दौरान निर्माण की गुणवत्ता से संबंधित उन सभी बिंदुओं को देखा जाएगा, जिनका उल्लेख जनहित याचिका में किया गया है। विशेष रूप से भवन की संरचनात्मक मजबूती, आरसीसी कार्य, बीम-कॉलम कनेक्शन, कास्टिंग, सीढ़ियों, ईंट-पत्थर और प्लास्टर, लिंटल, फिनिशिंग तथा अन्य निर्माण गतिविधियों की तकनीकी स्थिति का परीक्षण किया जाना है। यदि निरीक्षण के दौरान भवन में निर्धारित मानकों से जुड़ी कोई कमी पाई जाती है तो जांच दल को उसके समाधान के लिए तत्काल और दीर्घकालिक सुधारात्मक उपाय सुझाने होंगे।
भवन को और नुकसान से बचाने के लिए भी बताने होंगे उपाय
हाईकोर्ट ने जांच टीम को केवल कमियां गिनाने तक सीमित नहीं रखा है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि यदि भवन के किसी हिस्से में ऐसी तकनीकी समस्या सामने आती है, जिससे संरचना को आगे नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो उससे बचाव के लिए आवश्यक आपात उपायों की जानकारी भी दी जाए।
इसका मतलब यह है कि जांच के दौरान सामने आने वाली किसी गंभीर कमी की स्थिति में उसे दूर करने के लिए तत्काल उठाए जाने वाले कदमों के साथ-साथ भविष्य में भवन की मजबूती और उपयोगिता बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक समाधान भी सुझाए जाएंगे।
17 अक्टूबर तक निरीक्षण, 6 नवंबर को रिपोर्ट
अदालत के निर्देशों के अनुसार, संयुक्त जांच टीम को 17 अक्टूबर 2026 या उससे पहले निर्माणाधीन न्यायालय परिसर का निरीक्षण पूरा करना होगा। निरीक्षण के बाद तैयार की जाने वाली विस्तृत रिपोर्ट 6 नवंबर 2026 तक हाईकोर्ट में पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई भी 6 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। ऐसे में अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने भवन की तकनीकी स्थिति से संबंधित विशेषज्ञ रिपोर्ट महत्वपूर्ण रहेगी।
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जिला न्यायालय भवन की गुणवत्ता पर टिकी निगाहें
बालोतरा जिला बनने के बाद यहां न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में जिला न्यायालय परिसर का निर्माण महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने इस परियोजना को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद विशेषज्ञों की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। यदि जांच में कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम सुझाए जाएंगे।
फिलहाल निर्माण संबंधी लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। हाईकोर्ट के निर्देश पर होने वाली तकनीकी जांच और उसके बाद प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट से ही भवन की वास्तविक निर्माण गुणवत्ता और सामने आई आपत्तियों की स्थिति स्पष्ट होगी।