ग्रामीणों ने पदयात्रा निकाल कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
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जैसलमेर में रामगढ़ इलाके के पारेवर गांव की ओरण की जमीन को वंडर सीमेंट को अलॉट करने के मामले में ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में ग्रामीण ओरण बचाओ टीम के साथ पारेवर गांव से पदयात्रा निकाल जैसलमेर पहुंचे। करीब 15 से 20 लोगों की टीम इस कड़ाके की ठंड में पदयात्रा कर बुधवार को जैसलमेर पहुंची। कलेक्टर के साथ जैसलमेर विधायक को भी ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों की मांग है कि ओरण की जमीन को छोड़कर वंडर सीमेंट कंपनी अपना प्लांट लगाए, ताकि पेड़-पौधों, वनस्पति और जीव जंतुओं को नुकसान न हो।
पर्यावरण प्रेमी और ओरण बचाओ टीम के सुमेर सिंह सांवता ने बताया कि साल 2022 में सरकार ने पारेवर गांव की करीब 2,400 बीघा जमीन वंडर सीमेंट के प्लांट के लिए अलॉट कर दी। जबकि उस जमीन में ओरण की जमीन भी शामिल है। हमारी मांग है कि उस जमीन का अलॉटमेंट खारिज करके प्रशासन ओरण की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में ओरण के नाम से दर्ज करवाए।
कड़ाके की ठंड में 50 किमी पदयात्रा
जैसलमेर के पारेवर गांव से मंगलवार को ग्रामीणों द्वारा निकाली गई ओरण यात्रा जैसलमेर पहुंची। जैसलमेर की कड़ाके की ठंड में 15 वे 20 लोग पदयात्रा में शामिल रहे। बीच-बीच में कई गांवों के ग्रामीण इनसे मुलाकात कर हौसला बढ़ाए। सुमेर सिंह का कहना है कि ओरण की जमीन को निजी कंपनियों के हाथों बेंचकर हम सब अपना ही नुकसान कर रहे हैं। इसलिए हमें ओरण की जमीन को बचाना है और वन्य जीवों आदि को बचाकर पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में मददगार बनना होगा।
क्या होता है ओरण
ओरण उस इलाके को कहते हैं, जहां देवी देवता या लोक देवता का मंदिर होता है। उसके आसपास की जमीन को ओरण की जमीन कहते हैं। ओरण की जमीन पर पेड़-पौधे आदि लगे होते हैं, जिनको काटना भी अपराध की श्रेणी में आता है। पशु-पक्षी और अन्य जानवर बेखौफ इस इलाके में विचरण कर सकते हैं। उस इलाके को ओरण कहा जाता है। जैसलमेर में लाखों बीघा ओरण की जमीने हैं, जो आज भी सरकार के रिकॉर्ड में बंजर जमीन के नाम से दर्ज हैं और उसे सोलर और विंड कंपनियों को अलॉट किया जा रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि ये ओरण में ही दर्ज हों, ताकि पर्यावरण का बचाव हो सके।