राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार से अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को स्पष्ट बताए कि किस वर्ग को कितना आरक्षण दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि अदालत से दो बार फटकार लगने और अवमानना की स्थिति बनने के बाद ही सरकार सक्रिय हुई, जिसके बाद सवा साल से अटकी यह रिपोर्ट सामने आ गई।
900 पन्नों की रिपोर्ट, 74.85 लाख परिवारों का हुआ सर्वे
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने दो भागों और लगभग 900 पन्नों की रिपोर्ट 5 अगस्त को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपी थी। आयोग के अध्यक्ष और पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने आयोग के सदस्यों और विभागीय मंत्रियों की मौजूदगी में यह रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट तैयार करने के लिए करीब 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया, जिसमें राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े 19 प्रश्न शामिल थे। सर्वे के मुताबिक, राज्य में जाट जाति की आबादी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सर्वाधिक है।
60 निकाय अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित होने का प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में से 60 अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसी अनुपात के आधार पर पंचायती राज संस्थाओं में भी आरक्षण लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था में अति पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया गया है।
तीन जिलों में सभी सीटें ST वर्ग के लिए आरक्षित
सलूम्बर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में शत-प्रतिशत सीटें जनजातीय वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी। वहीं, 7 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में पंचायत और निकाय चुनाव 'एक राज्य-एक चुनाव' की अवधारणा के तहत कराने तथा एससी, एसटी और ओबीसी सीटों के लिए लॉटरी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया।
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जूली बोले- जनता के सामने रिपोर्ट का सच आए
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार से आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आरक्षण की व्यवस्था किस आधार पर तय की जा रही है और अलग-अलग वर्गों को कितना आरक्षण मिलेगा।