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Rajasthan News: जातीय वैमनस्य और झूठे आरोपों के मामले में शिक्षक कैलाश चंद सामोता निलंबित, जानें

Tue, 16 Sep 2025 05:15 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/राजसमंद

सार

Rajasthan News: शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षक द्वारा फैलाए गए भ्रामक प्रचार और अनुचित गतिविधियों से विभाग की छवि धूमिल हुई है, ऐसे में निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई करना आवश्यक था।
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शिक्षा मंत्री मदन दिलावर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के राजसमंद जिले में कार्यरत शिक्षक कैलाश चंद सामोता को गंभीर आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्राथमिक शिक्षा राजसमंद ने आदेश जारी कर सामोता को तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित करने के निर्देश दिए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पंचायत समिति देलवाड़ा निर्धारित किया गया है।

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सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप
जानकारी के मुताबिक, कैलाश चंद सामोता राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय धुकल सिंह जी का खेड़ा पंचायत समिति आमेट में गणित/विज्ञान विषय के अध्यापक लेवल-2 के पद पर कार्यरत थे। सामोता पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए। यही नहीं, उन्होंने उच्च अधिकारियों पर झूठे और गंभीर आरोप लगाए तथा राजनीतिक दलों का समर्थन भी किया।
 
बिश्नोई समाज पर अभद्र टिप्पणी का मामला
आदेश में यह भी उल्लेख है कि सामोता ने बिश्नोई समाज के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कीं, जिससे जातीय वैमनस्य फैलने की आशंका बनी। मनोज विश्नोई नामक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सामोता ने अपने यूट्यूब चैनल पर समाज के खिलाफ गलत वीडियो और फोटो साझा कर समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाई।
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पूर्व में भी विवादों में रहे शिक्षक
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को भेजी गई शिकायतों में यह आरोप भी लगाया गया कि सामोता कई बार सहकर्मियों से झगड़ते और दुर्व्यवहार करते रहे हैं। प्रोबेशन काल में अनुचित लाभ उठाकर वेतन लेने, विद्यालय का माहौल बिगाड़ने, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आवाज उठाने और समाचार पत्रों में प्रदर्शन की खबरें छपवाने जैसे मामले भी उनके खिलाफ सामने आए।
 
विभागीय कार्रवाई और जांच
इन सभी आरोपों के आधार पर सामोता के खिलाफ सीसीए-16 के तहत जांच प्रस्तावित की गई है। विभागीय कार्रवाई राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 13 (एक) के अंतर्गत की गई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षक द्वारा फैलाए गए भ्रामक प्रचार और अनुचित गतिविधियों से विभाग की छवि धूमिल हुई है, ऐसे में निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई करना आवश्यक था।

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