सार
फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार विवाद ‘पद्मावत’ में जौहर पर दिए उनके बयान को लेकर है। स्वरा भास्कर मानती हैं कि महिलाओं को जीने का अधिकार है, चाहे उनके साथ बलात्कार हुआ हो। इस बयान को करणी सेना महिला शाखा की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने वीरांगनाओं के बलिदान का अपमान बताया है।
फिल्म पद्मावत में जौहर के चित्रण और उसके महिमामंडन को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। स्वरा भास्कर ने जौहर की प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को हर परिस्थिति में जीने का अधिकार है। उनके इस बयान पर करणी सेना महिला विंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
स्वरा भास्कर ने पद्मावत में जौहर के महिमामंडन पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को जीने का अधिकार है, चाहे उनके साथ बलात्कार हुआ हो या उनके पति, रक्षक और मालिक की मृत्यु हो गई हो। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में आत्मदाह जैसी प्रथा को महिमामंडित करने की कोई जरूरत नहीं है।
स्वरा के इस बयान पर जयपुर में करणी सेना महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि स्वरा भास्कर को पहले अपनी भाषा सुधारनी चाहिए। सनातन परंपरा और राजपूताना की वीरांगनाओं के बलिदान व शौर्य पर सवाल उठाने या आपत्तिजनक टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं है। कीर्ति राठौड़ ने कहा कि राजपूताना का इतिहास वीरांगनाओं के त्याग, साहस और बलिदान की गवाही देता है। जौहर को समझने के लिए उस दौर के इतिहास, परिस्थितियों और सामाजिक पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि यदि किसी ऐतिहासिक प्रथा पर सवाल उठाना है तो इतिहास और तथ्यों के आधार पर सवाल उठाए जाने चाहिए, लेकिन वीरांगनाओं के बलिदान को अपमानजनक शब्दों में संबोधित करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। करणी सेना महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उनकी संस्था ऐसे बयानों का विरोध करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतिहास की घटनाओं पर बहस हो सकती है, लेकिन ऐतिहासिक चरित्रों और वीरांगनाओं के त्याग एवं बलिदान के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है। स्वरा भास्कर के बयान के बाद एक बार फिर पद्मावत, जौहर और राजपूताना इतिहास के चित्रण को लेकर बहस तेज हो गई है। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर है।