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RCA चुनाव का रास्ता साफ: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से किया इनकार, एडहॉक कमेटी की SLP वापस

Tue, 07 Jul 2026 02:37 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) के लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक और कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के 1 जुलाई 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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मौके पर मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) में लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक और कानूनी विवाद पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के 1 जुलाई 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पूर्व एडहॉक समिति की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस लेने की अनुमति दे दी गई। इस फैसले के साथ ही राजस्थान क्रिकेट संघ में नए चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार नियुक्त प्रशासक की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने SLP वापस लेने की दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत के रुख को देखते हुए अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट का 1 जुलाई 2026 का आदेश पूरी तरह प्रभावी हो गया और उससे जुड़ी सभी कानूनी अनिश्चितताएं समाप्त हो गईं।

तीन महीने में कराए जाएंगे RCA के चुनाव

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सेवानिवृत्त आईएएस भास्कर ए. सावंत को राजस्थान क्रिकेट संघ का प्रशासक नियुक्त किया गया है। उन्हें संघ का प्रशासन संभालने के साथ-साथ तीन माह के भीतर निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि 29 जुलाई 2026 तक चुनाव कार्यक्रम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
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प्रशासक की ओर से अदालत में रखा गया पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में प्रशासक की ओर से राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासक ने राजस्थान क्रिकेट संघ का कार्यभार और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP प्रशासक की ओर से नहीं, बल्कि पूर्व एडहॉक समिति के सदस्यों द्वारा दायर की गई थी। इसलिए इसे वर्तमान अधिकृत प्रशासक की याचिका नहीं माना जा सकता।

बिना अनुमति दायर हुई थी याचिका

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि प्रशासक के कार्यभार संभालने के बाद सुप्रीम कोर्ट को इसकी औपचारिक जानकारी दे दी गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष अनुमति याचिका प्रशासक की जानकारी या अनुमति के बिना दायर की गई थी। इस तर्क के बाद अदालत के समक्ष यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई कि याचिका पूर्व एडहॉक समिति की ओर से दायर की गई थी, न कि वर्तमान प्रशासक की ओर से।

क्या था हाईकोर्ट का आदेश?

गौरतलब है कि 1 जुलाई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूर्व एडहॉक समिति को हटाते हुए भास्कर ए. सावंत को राजस्थान क्रिकेट संघ का प्रशासक नियुक्त किया था। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि संघ का पूरा प्रशासन प्रशासक संभालेंगे और तीन माह के भीतर लोकतांत्रिक, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराए जाएंगे। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को न्यायालय की निगरानी में समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए थे।

हाईकोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती

इसी आदेश को चुनौती देते हुए पूर्व एडहॉक समिति के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत के रुख के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का निर्णय लिया, जिससे पूर्व एडहॉक समिति को किसी प्रकार की राहत नहीं मिल सकी।

अब आगे क्या होगा?

अब राजस्थान क्रिकेट संघ में चुनाव प्रक्रिया प्रशासक की निगरानी में आगे बढ़ेगी। मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा, निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति होगी, चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाएंगी। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आगामी तीन माह के भीतर राजस्थान क्रिकेट संघ को नई निर्वाचित कार्यकारिणी मिलने की संभावना है।

लंबे विवाद के बाद खत्म हुई प्रशासनिक अनिश्चितता

राजस्थान क्रिकेट संघ लंबे समय से प्रशासनिक विवादों, चुनावी मतभेदों और कानूनी चुनौतियों से घिरा हुआ था। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से संघ में लंबे समय से बनी प्रशासनिक अनिश्चितता समाप्त होगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नई कार्यकारिणी के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब सभी की निगाहें 29 जुलाई 2026 तक न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले चुनाव कार्यक्रम और उसके बाद शुरू होने वाली निर्वाचन प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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