जयपुर मिलिट्री स्टेशन में सप्त शक्ति कमांड के तत्वावधान में ज्ञान शक्ति थिंक टैंक द्वारा 2 मई को ईरान युद्ध एवं उसके भू-राजनीतिक प्रभाव विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सेवारत सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, शिक्षाविद् और जयपुर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
सेमिनार के पैनल में पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया सहित मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ तीन पूर्व राजदूत दिनकर श्रीवास्तव, गोपाल बागले और सतीश मेहता शामिल रहे। इन सभी वक्ताओं ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर ईरान युद्ध से जुड़े विभिन्न आयामों पर गहन विचार साझा किए।
वक्ताओं ने मध्य पूर्व क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और युद्धरत देशों की रणनीतिक सोच पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक प्रभाव वाला है। उन्होंने इस युद्ध के कारण विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संभावित बाधाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
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इसके अलावा सेमिनार में आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि आज के युद्धों में पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर क्षमताएं और एयर पॉवर की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। साथ ही नेतृत्व पर हमले, सूचना युद्ध और तकनीकी हस्तक्षेप जैसे नए आयाम भी युद्ध की दिशा तय कर रहे हैं।
समापन संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत, चीफ ऑफ स्टाफ, सप्त शक्ति कमांड ने सभी वक्ताओं के विचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धों में वैश्विक अंतरनिर्भरता का शस्त्रीकरण, बदलते शक्ति केंद्र और आर्थिक दबाव जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें समझना अत्यंत आवश्यक है।
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक, जिसने नवंबर 2024 में अपने पहले सेमिनार के साथ शुरुआत की थी, अब तक विभिन्न सामरिक और रक्षा विषयों पर तेरह सेमिनार आयोजित कर चुका है। यह मंच रणनीतिक विमर्श को बढ़ावा देने के साथ-साथ पूर्व सैनिकों और विशेषज्ञों के अनुभवों को साझा करने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।