NEET-2026 पेपर लीक मामले की जांच के दौरान सामने आए नए खुलासों ने अब NEET-2025 की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में गिरफ्तार जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और उनके परिवार से जुड़े छात्रों के चयन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार और जांच एजेंसियों को सीधे निशाने पर लिया है, जबकि भाजपा बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा पर हमला बोलते हुए लिखा कि आरोपी दिनेश और मांगीलाल बिवाल के परिवार के पांच बच्चों का चयन ही नहीं हुआ, बल्कि जमवारामगढ़ क्षेत्र से भाजपा विधायक महेंद्र पाल के भतीजे का चयन भी सवालों के घेरे में है। डोटासरा ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी दिनेश ने बड़े लोगों के शामिल होने की बात कही थी और अब भाजपा नेताओं से जुड़े नाम सामने आने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है। उन्होंने केंद्र सरकार और सीबीआई से पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की मांग की।
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नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जब आरोपी खुद बड़े लोगों को बचाने की बात कर रहे हैं तो जांच एजेंसियों को उन नामों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वे कौन लोग हैं, जिन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। जूली ने सीबीआई की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो देश के लाखों छात्रों का भरोसा टूट जाएगा।
सीबीआई जांच में सामने आया है कि जमवारामगढ़ निवासी विकास बिवाल ने कथित तौर पर NEET-2025 का पेपर भी खरीदा था। जांच एजेंसी को मिले इनपुट्स के अनुसार गुरुग्राम निवासी यश यादव ने विकास को वर्ष 2025 और 2026 दोनों में पेपर उपलब्ध कराया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि करीब 25 लाख रुपए में हुई डील के बाद विकास और उसके चार भाई-बहनों ने परीक्षा से पहले कथित प्रश्नपत्र पढ़ा और बाद में सभी का सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चयन हो गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार चयनित छात्रों का पूर्व शैक्षणिक रिकॉर्ड सामान्य था लेकिन NEET-2025 में उनके स्कोर अचानक असामान्य रूप से बढ़ गए। यही कारण है कि अब NEET-2025 की विश्वसनीयता भी जांच के दायरे में आ गई है। सीबीआई ने आरोपी शुभम खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें सात दिन की रिमांड पर भेज दिया गया।
इधर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन पांच बच्चों के चयन की बात हो रही है, वह कांग्रेस शासनकाल में हुई परीक्षा का मामला है। हालांकि कांग्रेस ने उनके बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि राजस्थान और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार है, इसलिए जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा लगातार दिनेश बिवाल से दूरी बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि उसके सोशल मीडिया अकाउंट भाजपा नेताओं और कार्यक्रमों की तस्वीरों से भरे पड़े हैं।
मामले में सीबीआई द्वारा जमवारामगढ़ स्थित दिनेश बिवाल के घर और फार्म हाउस पर छापेमारी के दौरान बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक और कथित परीक्षा दस्तावेज मिलने की भी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अब करोड़ों रुपए के लेनदेन, संपत्तियों और लग्जरी वाहनों में निवेश की भी पड़ताल कर रही है। पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति के साथ-साथ देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।