जोबनेर-महलां राजमार्ग पर शनिवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया। यहां टैगोर स्कूल की बाल वाहिनी बस और स्कॉर्पियो की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गए। हादसे में स्कूल बस में सवार करीब डेढ़ दर्जन बच्चे घायल हो गए।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही जोबनेर पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। हादसे के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहनों में फंसे बच्चों को बाहर निकालकर तत्काल जोबनेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। उपचार के दौरान 9 बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए जयपुर रेफर किया गया। वहीं स्कॉर्पियो में सवार यात्रियों को भी मामूली चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो सवार लोग चित्तौड़ से खाटूश्यामजी दर्शन के लिए जा रहे थे।
स्कूल बसों की रफ्तार पर फिर उठे सवाल
हादसे के बाद स्कूल बसों की रफ्तार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई निजी स्कूलों की बसें तेज गति से गुजरती हैं। बच्चों और अभिभावकों की ओर से भी समय-समय पर बसों की तेज रफ्तार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
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जोबनेर-महलां मार्ग के कई हिस्सों में सड़क खराब और जगह-जगह टूटी हुई है। ऐसे में तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बसों की नियमित फिटनेस जांच, समय पर रखरखाव और चालकों की गति पर निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।
पहले भी सामने आ चुके हैं बस हादसे
क्षेत्र में कुछ दिन पहले भी स्कूली बच्चों से भरी बस के पलटने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद अब स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावी जांच की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर स्कूल बसों की फिटनेस, परमिट, चालक की योग्यता, गति सीमा और सुरक्षा मानकों की जांच करनी चाहिए। बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण और निर्धारित मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाना स्कूल प्रबंधन, बस संचालक और चालक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। एक छोटी सी लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। जोबनेर हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की बस आखिर कितनी सुरक्षित है और स्कूल बसों की रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण कब होगा?