लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह तथा अन्य
- फोटो : अमर उजाला
जयपुर के मिलिट्री स्टेशन में सप्त शक्ति कमान के अधीन ज्ञान शक्ति थिंक टैंक (GSTT) द्वारा ‘द चाइना चैलेंज’ विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस अवसर पर सप्त शक्ति कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल एस.एल. नारसिम्हन (सेवानिवृत्त), राजदूत गौतम बंबावाले, राजदूत सतीश मेहता और प्रोफेसर एलिजाबेथ रोच (जिंदल यूनिवर्सिटी) जैसे प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए।
चीन की आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षमता पर गहन विश्लेषण
सेमिनार में चीन की तेजी से बढ़ती आर्थिक प्रगति, सैन्य शक्ति, तकनीकी श्रेष्ठता और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के आधार पर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि चीन का उद्देश्य न केवल एशिया, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को सुदृढ़ करना है। पैनल ने भारत–चीन संबंधों की बदलती प्रकृति, महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता और चीन की पड़ोसी क्षेत्रों में बढ़ती मौजूदगी के प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया।
भारत के लिए आत्मनिर्भरता और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
वक्ताओं ने इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को आत्मनिर्भरता, रणनीतिक साझेदारी और तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना था कि भारत यदि अपनी रक्षा तकनीक और उत्पादन क्षमता को बढ़ाए तो वह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अधिक सशक्त भूमिका निभा सकता है।
यह भी पढ़ें- Anta By Election: उपचुनाव मैदान में 15 प्रत्याशी, पर असली मुकाबला त्रिकोणीय! मोरपाल, भाया और मीणा पर सबकी नजर
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक की स्थापना और उद्देश्य
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक (GSTT) की स्थापना नवंबर 2024 में की गई थी, जिसका उद्देश्य सैन्य–नागरिक सहयोग को बढ़ावा देना, उन्नत तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना और रणनीतिक संवाद को सशक्त बनाना है। इससे पहले भी यह थिंक टैंक ‘डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता’, ‘वेटरन्स का योगदान’ और ‘भारत के पड़ोस में बदलते भू–रणनीतिक परिदृश्य’ जैसे विषयों पर संगोष्ठियों का आयोजन कर चुका है।
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह बोले- ऐसे संवाद नई दृष्टि देते हैं
अपने समापन संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार युवा सैन्य नेतृत्व को वैश्विक परिदृश्य को बेहतर समझने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ राजनयिकों और विशेषज्ञों के अनुभव से मिली अंतर्दृष्टि भारत की रणनीतिक सोच और नीति निर्माण को और सशक्त बनाएगी।
यह भी पढ़ें- ‘आज तो बच गया, पर अगली बार नहीं बचेगा’: ट्रेलर से कुचलकर युवक की हत्या का आरोप; परिजनों ने जाम किया हाईवे