राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस जबरदस्त तरीके से सरकार पर हमले बोल रही है। कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने गुरुवार को राज्यपाल अभिभाषण पर बहस के दौरान सरकार पर आरोप लगाए कि कर्मचारियों के तबादले जाति देखकर किए जा रहे हैं। भाकर के आरोपों पर सदन में माहौल गरमाता नजर आया।
उन्होंने सरकार की तबादला नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कहा कि जाट अफसरों और कर्मचारियों की जाति देखकर तबादले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सारे दफ्तर आपने ठेके पर दे दिए हैं। इसी तरह चलता रहा है तो जनता आप लोगों को गांवों में घुसने नहीं देगी।
गौरतलब है कि पिछले सत्र में भी जातिगत दुर्भावना से तबादले किए जाने का मुद्दा सदन में गूंजा था। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी जातिगत आधार पर ताबादलों की सूचियां काफी वायरल की गई थीं। मुकेश भाकर ने कहा कि "आप लोगों ने जिस तरह से शेखावाटी और मारवाड़ में जाट समाज को टारगेट किया है, जाट समाज के लोगों की जाति और नाम देखकर ट्रांसफर किया जा रहा है, दुर्भावना से हमारे समाज के लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। लोग गांवों में आपको घुसने नहीं देंगे।"
गहलोत ने किया भाकर के आरोपों पर पलटवार
मंत्री अविनाश गहलोत ने भाकर के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, “यह मुकेश भाकर की गलती नहीं है, बल्कि उनकी पार्टी की संस्कृति ही जातिवाद का जहर घोलने की है।”
जूली बोले- तबादलों की निष्पक्ष जांच हो
वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तबादलों की लिस्ट की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामले पर हस्तक्षेप करते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम ने कहा कि कांग्रेस को मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधने से बचना चाहिए। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जब भाजपा खुद आरोप लगाती है, तो कांग्रेस को सवाल उठाने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने मांग की कि तबादलों की लिस्ट की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
राजनीतिक दुर्भावना से झुंझुनू के कर्मियों का दूर किया गया ट्रांसफर
कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने सरकार पर “रिवेंज पॉलिटिक्स” का आरोप लगाते हुए कहा कि झुंझुनू के कर्मचारियों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर दूरदराज के इलाकों में भेज दिया गया है।