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राजस्थान में RGHS पर टकराव: 700 निजी अस्पतालों का सेवाएं बंद करने का दावा, योजना पर सरकार बोली- सब चंगा सी

Thu, 26 Mar 2026 06:03 PM IST
Himanshu Priyadarshi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

RGHS Standoff In Rajasthan: राजस्थान में RGHS को लेकर सरकार और निजी अस्पतालों के बीच विवाद बढ़ा है। अस्पतालों ने सेवाएं बंद करने का दावा किया है, जबकि सरकार ने इसे खारिज किया। भुगतान विवाद के बीच कर्मचारियों और मरीजों पर असर पड़ रहा है। वहीं, पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
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RGHS को लेकर सरकार और निजी अस्पताल संचालकों के बीच टकराव तेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में राजस्थान गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर सरकार और निजी अस्पताल संचालकों के बीच टकराव तेज हो गया है। ‘राजस्थान एलायंस ऑफ ऑल हॉस्पिटल एसोसिएशन’ (RAHA) ने दावा किया है कि राज्य के करीब 700 निजी अस्पतालों, 5 हजार डॉक्टरों और 4200 दवा दुकानों ने RGHS के तहत ओपीडी और कैशलेस दवा सेवाएं बंद कर दी हैं। वहीं, सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि योजना पहले की तरह अच्छी तरह से चल रही है।

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आखिर टकराव की वजह है क्या?
RAHA के अनुसार, पिछले 9 महीनों से अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के भुगतान लंबित हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ गया है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि जब तक बकाया राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान नहीं किया जाता, तब तक सेवाएं बहाल नहीं की जाएंगी। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार या तो योजना को बंद करे या कैशलेस मॉडल के स्थान पर पुनर्भरण (रिइम्बर्समेंट) मॉडल लागू करे और एम्पैनलमेंट प्रक्रिया में पारदर्शिता लाए।
 
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने किया यह दावा
दूसरी ओर, राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल ने कहा कि RGHS पूरी तरह से चालू है और मरीजों को नियमित लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि बुधवार को ही प्रदेशभर में लगभग 39 हजार टीआईडी जनरेट हुए। इनमें करीब 21 हजार मरीजों ने उपचार लिया, जिसमें 19 हजार ओपीडी और 2 हजार आईपीडी एवं डे-केयर मरीज शामिल रहे। वहीं 19 हजार मरीजों ने एम्पैनल फार्मेसी से दवाइयां हासिल की।
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‘इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता’
इस मुद्दे पर कर्मचारियों की चिंता भी सामने आई है। अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि कर्मचारी नियमित रूप से अपनी अंश राशि जमा कर रहे हैं, इसलिए उन्हें इलाज और दवाइयों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।



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पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा तथा मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र खींवसर - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य मंत्री मामले से अनजान
राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने कहा कि RGHS को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं और योजना के घाटे को कम किया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस योजना को इंश्योरेंस मॉडल से जोड़ा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने अस्पतालों द्वारा सेवाएं बंद किए जाने की जानकारी से अनजान होने की बात कही। साथ उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा।
 
‘प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमराईं’
वहीं, पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RGHS को कमजोर करने के लिए कई पाबंदियां लगाई गई हैं और करोड़ों रुपये के क्लेम लंबित हैं, जिससे निजी अस्पताल सेवाएं बंद करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था बढ़ गई है और मरीजों को बाहर जाकर इलाज कराना पड़ रहा है।
 
‘RGHS योजना दम तोड़ने की कगार पर
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सोशल मीडिया पर सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि RGHS जैसी योजना दम तोड़ने की कगार पर है। फिलहाल, RGHS को लेकर सरकार और अस्पतालों के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस विवाद का सीधा असर लाखों कर्मचारियों और लाभार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर इलाज और दवाइयों की सुविधा मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।

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