पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा तथा मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र खींवसर
- फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य मंत्री मामले से अनजान
राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने कहा कि RGHS को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं और योजना के घाटे को कम किया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस योजना को इंश्योरेंस मॉडल से जोड़ा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने अस्पतालों द्वारा सेवाएं बंद किए जाने की जानकारी से अनजान होने की बात कही। साथ उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा।
‘प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमराईं’
वहीं, पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RGHS को कमजोर करने के लिए कई पाबंदियां लगाई गई हैं और करोड़ों रुपये के क्लेम लंबित हैं, जिससे निजी अस्पताल सेवाएं बंद करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था बढ़ गई है और मरीजों को बाहर जाकर इलाज कराना पड़ रहा है।
‘RGHS योजना दम तोड़ने की कगार पर’
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सोशल मीडिया पर सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि RGHS जैसी योजना दम तोड़ने की कगार पर है। फिलहाल, RGHS को लेकर सरकार और अस्पतालों के बीच गतिरोध बना हुआ है। इस विवाद का सीधा असर लाखों कर्मचारियों और लाभार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर इलाज और दवाइयों की सुविधा मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।