राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में कांग्रेस के आबादी बनाम भागीदारी का मुद्दा उछाल दिया है- इस मुद्दे के उठने के साथ ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट विवादों में आ गई है। जानिए इस पर कांग्रेस और बीजेपी का क्या कहना है...
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण की लॉटरी का पहला चरण ही विवादों में आ गया है। पंचायत-निकाय चुनाव के सियासी मुद्दे क्या होंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन एक मुद्दा जो फिलहाल चर्चाओं में आ चुका है वह है- आबादी बनाम भागीदारी का। क्या यह मुद्दा राजस्थान के सियासी पारे को परवान दे पाएगा? कांग्रेस ने आरक्षण लॉटरी के बाद सरकार पर ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के साथ अन्याय और आंकड़ों में विसंगति का आरोप लगा दिया है।
वहीं जालोर में ओबीसी आबादी 41.36 प्रतिशत है, लेकिन अनुशंसित आरक्षण 20.93 प्रतिशत है। दूसरी ओर बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में ओबीसी आबादी क्रमशः 8.42, 12.13, 14.43 और 15.82 प्रतिशत दर्ज है, जबकि इन जिलों में अनुशंसित ओबीसी आरक्षण शून्य है।
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कांग्रेस ने 192 सीटों के आंकड़े पर उठाया सवाल
डोटासरा ने कहा कि जिला परिषदों में 50 प्रतिशत की कुल सीमा के भीतर ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण मिलता तो 294 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, लेकिन जिला परिषदों में ओबीसी को कुल 192 सीटों पर रिजर्वेशन मिला है। डोटासरा ने कहा कि इस हिसाब से 102 वार्ड कम आरक्षित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि 457 पंचायत समितियों के 8,245 निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीसी के लिए 1,101 वार्ड यानी करीब 13.35 प्रतिशत आरक्षण की बात कही है। पार्टी के मुताबिक 21 प्रतिशत आरक्षण होने पर 1,731 वार्ड आरक्षित हो सकते थे, यानी 630 वार्ड का अंतर है।
कांग्रेस का दावा क्या है?
कांग्रेस ने दावा किया है कि कई जिलों में एससी-एसटी और ओबीसी का संयुक्त आरक्षण भी 40 प्रतिशत से नीचे है। पार्टी ने अजमेर, बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, चूरू, डीग, डीडवाना-कुचामन, जैसलमेर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, फलोदी और सीकर के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से आरक्षण निर्धारण का आधार सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि जब कई जिलों में ओबीसी आबादी 45 से 50 प्रतिशत या उससे अधिक बताई जा रही है, तो वहां ओबीसी आरक्षण 10-20 प्रतिशत के आसपास क्यों है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ये आंकड़े किस सर्वे, पद्धति और मानक के आधार पर तैयार किए गए हैं।
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