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Jaipur: 'धर्म, समाज और राजनीति ने महिलाओं से बिना सवाल आज्ञाकारिता की अपेक्षा की', JLF में बोलीं बानू मुश्ताक

Thu, 15 Jan 2026 07:47 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Jaipur: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के उद्घाटन सत्र से पहले साहित्य, स्त्री विमर्श और सामाजिक यथार्थ पर गहरी चर्चा देखने को मिली। इस दौरान कर्नाटक की मशहूर कन्नड़ लेखिका, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता बानू मुश्ताक ने बताया कि उन्हें व्यापक पहचान 26 वर्ष की उम्र में मिली, जब उनकी कहानी लोकप्रिय कन्नड़ पत्रिका प्रजामाता में प्रकाशित हुई।
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बानू मुश्ताक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के उद्घाटन सत्र से पहले आयोजित ‘हार्ट लैम्प’ सेशन में बुकर प्राइज विजेता, कर्नाटक की मशहूर कन्नड़ लेखिका, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता बानू मुश्ताक की चर्चित पुस्तक हार्ट लैम्प पर गहन संवाद हुआ। इस सत्र में लेखिका बानू मुश्ताक से चर्चाकार मौतशी मुखर्जी ने संवाद किया। कार्यक्रम में साहित्य, स्त्री विमर्श और सामाजिक यथार्थ पर गहरी चर्चा देखने को मिली।
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महिलाओं के साथ क्रूरता और भेदभाव का सिलसिला जारी
अपने लेखन को लेकर बानू मुश्ताक ने कहा कि उनकी रचनाएं यह दर्शाती हैं कि किस तरह धर्म, समाज और राजनीति ने महिलाओं से बिना सवाल किए आज्ञाकारिता की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह अपेक्षा केवल यहीं नहीं रुकती, बल्कि इसके बाद भी महिलाओं के साथ क्रूरता और भेदभाव का सिलसिला जारी रहता है। उनकी कहानियां इसी असमान व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं और स्त्रियों की आवाज को मजबूती से सामने लाती हैं।

26 वर्ष की उम्र में मिली पहचान
बानू मुश्ताक ने अपने लेखन की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि उन्होंने मिडिल स्कूल के समय अपनी पहली लघु कहानी लिखी थी। यहीं से उनके साहित्यिक सफर की नींव पड़ी। हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान 26 वर्ष की उम्र में मिली, जब उनकी कहानी लोकप्रिय कन्नड़ पत्रिका प्रजामाता में प्रकाशित हुई। इसके बाद साहित्य जगत का ध्यान उनके लेखन की ओर गया और उन्होंने एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण रचनाएं लिखीं।
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कई बार सम्मानित हो चुकी हैं बानू मुश्ताक
महिला केंद्रित साहित्य के लिए पहचानी जाने वाली बानू मुश्ताक कई बार कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। साहित्य के साथ-साथ वह महिला अधिकारों की वकालत करने और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके निजी जीवन में भी उन्हें पुरुष-प्रधान सोच से संघर्ष करना पड़ा। अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह कर उन्होंने सामाजिक अपेक्षाओं और रूढ़ियों को चुनौती दी।

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हार्ट लैम्प का कई भाषाओं में हो चुका है अनुवाद 
बानू मुश्ताक अब तक छह लघु कहानी संग्रह प्रकाशित कर चुकी हैं। इसके अलावा उनके साहित्य में एक उपन्यास, एक निबंध संग्रह और एक कविता संग्रह भी शामिल है। हार्ट लैम्प का अंग्रेजी में अनुवाद हो चुका है और यह पुस्तक अंग्रेजी के साथ-साथ उर्दू, हिंदी, तमिल और मलयालम भाषाओं में भी उपलब्ध है।
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