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Rajasthan News: गिरल आंदोलन के बाद फिर चर्चा में रविंद्र सिंह भाटी, क्या बदलेंगे राजस्थान की राजनीति के समीकरण

Wed, 20 May 2026 07:51 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

गिरल आंदोलन के दौरान खुद पर पेट्रोल डालने की घटना के बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी एक बार फिर राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रदेश की सियासत गरमा दी है, बल्कि राजपूत राजनीति और संभावित नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं।
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विधायक रविंद्र सिंह भाटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बाड़मेर के गिरल में मजदूर आंदोलन के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी द्वारा खुद पर पेट्रोल डालने की घटना ने राजस्थान की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। इस घटना के बाद प्रदेशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर बोलने से बचती नजर आई, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अशोक गहलोत और टीकाराम जूली ने भाटी के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए मजदूरों की लंबे समय से अनदेखी को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।

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गिरल आंदोलन में लगातार पंद्रह दिनों तक मजदूरों के बीच बैठे रहने और फिर आत्मदाह जैसे कदम की कोशिश ने रविंद्र सिंह भाटी को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। इससे पहले सोशल मीडिया पर छोटू सिंह रावणा और भाटी के बीच चली तीखी बयानबाजी से उनकी छवि को नुकसान पहुंचने की चर्चा थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गिरल आंदोलन ने भाटी को फिर से मजबूत जननेता के रूप में स्थापित कर दिया है।
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राजस्थान की राजनीति में करीब चालीस से पचास सीटें राजपूत प्रभाव वाली मानी जाती हैं, जिनमें मारवाड़, मेवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र प्रमुख हैं। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर और जयपुर जैसे जिलों में राजपूत समाज का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। लंबे समय से यह वर्ग भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में नाराजगी की चर्चा लगातार होती रही है।

राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज है कि यदि रविंद्र सिंह भाटी कांग्रेस का दामन थामते हैं तो वे युवा राजपूतों के लिए एक बड़े विकल्प के रूप में उभर सकते हैं। कांग्रेस के पास प्रताप सिंह खाचरियावास, भंवर सिंह भाटी, धर्मेंद्र सिंह राठौर और भंवर जितेन्द्र सिंह जैसे राजपूत चेहरे मौजूद हैं लेकिन पूरे राजस्थान के युवा राजपूत वर्ग को व्यापक स्तर पर जोड़ने वाला चेहरा अभी तक सामने नहीं आया। ऐसे में भाटी को कांग्रेस भविष्य की बड़ी संभावनाओं के रूप में देख रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रविंद्र सिंह भाटी तीसरे मोर्चे की राह चुनते हैं या कांग्रेस के साथ नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं।

 

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