राजधानी जयपुर के चौमूं क्षेत्र में बढ़ती अवैध कॉलोनियों और भू-माफियाओं की गतिविधियों को लेकर कांग्रेस विधायक डॉ. शिखा मील बराला ने राजस्थान विधानसभा में मामला उठाया। उन्होंने स्थगन प्रस्ताव नियम 50 के तहत चर्चा करते हुए कहा कि जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के क्षेत्रीय विस्तार के बावजूद आम जनता को मूलभूत विकास सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं दूसरी ओर अवैध कॉलोनियों का विस्तार लगातार जारी है, जिससे क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
जेडीए के क्षेत्रीय विस्तार के बाद भी जारी अवैध कॉलोनियां
विधायक डॉ. शिखा मील बराला ने बताया कि हाल ही में जयपुर विकास प्राधिकरण ने अपना क्षेत्रीय दायरा लगभग 3 हजार वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 6 हजार वर्ग किलोमीटर कर दिया है। इसके बावजूद कई स्थानों पर बिना कन्वर्जन, बिना स्वीकृत मास्टर प्लान और बिना आवश्यक अनुमतियों के कृषि भूमि पर प्लॉट काटकर जमीन बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से आम लोगों को भविष्य में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
कई क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों के विकसित होने का आरोप
विधायक ने कहा कि चौमूं क्षेत्र के सीकर रोड, वीर हनुमान जी रोड, सामोद और मोरीजा सहित कई गांवों में अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। लोगों को यह कहकर भ्रमित किया जा रहा है कि भविष्य में इन कॉलोनियों को नियमित कर दिया जाएगा। इस कारण लोग अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी इन प्लॉट्स में निवेश कर देते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है।
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रानी बांध क्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया
डॉ. शिखा मील बराला ने विधानसभा में रानी बांध और उसके बहाव क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर सीमांकन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जा सके।
भू-माफियाओं और राजनीतिक संरक्षण का लगाया आरोप
विधायक ने आरोप लगाया कि चौमूं में भू-माफियाओं और राजनीतिक संरक्षण का खतरनाक गठजोड़ बन गया है। उनके अनुसार मास्टर प्लान में बस स्टैंड और सेक्टर रोड के लिए निर्धारित स्थानों पर भी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने सरकार से अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमणों की पहचान कर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना था कि फिलहाल केवल औपचारिक कार्रवाई होती है, कुछ दिन अभियान चलता है और उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है, जिससे आम लोगों को विकास का लाभ नहीं मिल पाता और उनके अधिकार भी सुरक्षित नहीं रह पाते।