पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने राजस्थान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता के पारंपरिक रोटेशन से जनता अब परेशान हो चुकी है और आने वाले चुनाव में तीसरे मोर्चे के लिए अपार संभावनाएं हैं। गुढ़ा ने कहा कि तीसरा मोर्चा किसी एक नेता से नहीं, बल्कि जनता की इच्छा से बनेगा।
‘तीसरे विकल्प के लिए राजस्थान में पर्याप्त राजनीतिक जमीन’
गुढ़ा ने कहा कि राजस्थान में हर बार कांग्रेस और भाजपा के अलावा भी कई विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचते रहे हैं। ऐसे में यदि तीसरे विकल्प को सही तरीके से तैयार किया जाता है तो उसके लिए पर्याप्त राजनीतिक जमीन मौजूद है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के चुनावों के परिणाम भी प्रदेश की राजनीति पर असर डाल सकते हैं।
अखिलेश, AAP के प्रदर्शन से बदल सकता है राजस्थान का गणित
उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो अखिलेश यादव राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा चेहरा बन सकते हैं। इसी तरह पंजाब में आम आदमी पार्टी की वापसी या गुजरात में उसके अच्छे प्रदर्शन से राजस्थान में तीसरे विकल्प की राजनीति को नई दिशा मिल सकती है।
कांग्रेस की खींचतान पर गुढ़ा का निशाना
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए गुढ़ा ने कहा कि पार्टी के भीतर आपसी खींचतान लगातार दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि बड़े नेताओं की पार्टियां नहीं होतीं, बल्कि पार्टियां कार्यकर्ताओं की होती हैं। नेताओं के निजी हितों के कारण जब चुनाव प्रभावित होते हैं तो नेता पार्टी से बाहर भी चले जाते हैं।
भाजपा पर भी साधा निशाना, सरकार को लेकर उठाए सवाल
भाजपा को लेकर भी गुढ़ा ने कहा कि वर्तमान सरकार में मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। उनके मुताबिक भाजपा भी तीसरे मोर्चे को रोकने के लिए अपने स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रही है।
‘युवा और रोजगार होंगे सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा’
गुढ़ा ने सबसे बड़ा मुद्दा युवाओं और रोजगार को बताया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान उन्होंने मंत्रिमंडल की बैठक में भी चेताया था कि बेरोजगार युवा सरकार के खिलाफ जा सकते हैं। उनका कहना था कि उस समय अधिकांश मंत्री बड़ी संख्या में सीटें जीतने का दावा कर रहे थे, जबकि उन्होंने कांग्रेस की हार की आशंका जताई थी।
सोशल मीडिया के दौर में युवा ज्यादा जागरूक
उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया और मोबाइल के कारण पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक है। उसके पास जानकारी और सवाल दोनों हैं। यदि सरकार ने समय रहते रोजगार के मोर्चे पर ठोस कदम नहीं उठाए तो यही युवा चुनाव में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
बेरोजगार युवाओं को 10 हजार रुपये मासिक सहायता की वकालत
गुढ़ा ने बेरोजगार शिक्षित युवाओं के लिए आर्थिक सहायता देने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार देने के साथ तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कम से कम 10 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार सरकार को अपना बड़ा फोकस युवाओं और रोजगार पर करना होगा, क्योंकि आने वाले चुनाव में नौजवान निर्णायक भूमिका निभाएगा।