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Rajasthan: स्वतंत्रता दिवस से पहले युवाओं ने उठाई व्यवस्था पर आवाज, बोले- सिर्फ जश्न नहीं, बदलाव चाहिए

Sat, 15 Aug 2026 02:35 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

स्वतंत्रता दिवस से पहले राजस्थान के युवाओं ने आजादी के मायने को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। युवाओं ने कहा कि स्वतंत्रता केवल तिरंगा फहराने और कुछ दिनों तक जश्न मनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश में बेहतर व्यवस्था, समान अवसर, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित होना चाहिए।
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स्वतंत्रता दिवस से पहले युवाओं ने उठाई व्यवस्था पर आवाज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी में जुटा है। इस बीच राजस्थान के युवाओं ने आजादी के मायने को केवल तिरंगा फहराने और कुछ दिनों तक जश्न मनाने तक सीमित मानने से इनकार किया है। युवाओं ने साफ-सफाई, बेहतर सड़क व्यवस्था, महिला और बच्चों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भ्रष्टाचार पर लगाम, तिरंगे के सम्मान और न्याय व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे उठाए हैं। युवाओं का कहना है कि असली आजादी तभी सार्थक होगी, जब हर नागरिक को समान अवसर मिले, महिलाएं और बच्चे सुरक्षित हों, भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगे और आम लोगों को न्याय के लिए लंबे समय तक संघर्ष न करना पड़े।

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युवाओं ने जयपुर के महाराणा प्रताप स्कूल में छात्र प्रिंस सोनी की मौत के मामले को भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई, स्कूल प्रशासन की जवाबदेही और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि न्याय मिलने तक उनकी आवाज उठती रहेगी।

युवाओं ने कहा- देश सिर्फ इमारतों से नहीं, लोगों से मजबूत होता है

युवाओं का कहना है कि राष्ट्र केवल बड़ी इमारतों, सड़कों और विकास परियोजनाओं से नहीं बनता, बल्कि देश के नागरिक उसे मजबूत बनाते हैं। नई पीढ़ी व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव चाहती है और उसका मानना है कि युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि देश के भविष्य के जिम्मेदार नागरिक हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी का मतलब केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ऐसा समाज भी है जहां लोगों को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और न्याय मिल सके।

‘तिरंगा सिर्फ 15 अगस्त तक नहीं, हर दिन सम्मानित होना चाहिए’

युवाओं ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के आसपास लोग तिरंगा खरीदकर घरों और वाहनों पर लगाते हैं, लेकिन कुछ घंटों या अगले दिन वही राष्ट्रीय ध्वज सड़कों पर पड़ा दिखाई देता है।

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युवाओं ने कहा कि देशभक्ति केवल दो-तीन दिन के उत्साह का नाम नहीं है। तिरंगे का सम्मान पूरे साल होना चाहिए। लोगों को राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक संभालने और उसके अपमान को रोकने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

साफ-सफाई और बेहतर सड़क व्यवस्था की मांग

युवाओं ने शहरों में कचरे, खराब सड़कों और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विकास के नाम पर ऐसी सड़कें बनाई जा रही हैं, जहां बारिश का पानी जमीन में समाने के बजाय सड़कों पर जमा हो जाता है। जगह-जगह बने गड्ढे और जलभराव आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं।
युवाओं ने मांग की कि नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और सड़कों का निर्माण स्थानीय जरूरतों, जल निकासी और पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया जाए।

महिला सुरक्षा को लेकर युवाओं ने जताई चिंता

महिलाओं के खिलाफ अपराध और दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर भी युवाओं ने चिंता जताई। उनका कहना है कि महिला सुरक्षा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अपराध होने के बाद तेज और प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा मिले और पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए लंबे समय तक संघर्ष न करना पड़े।

प्रिंस सोनी मामले में न्याय की मांग

युवाओं ने जयपुर के महाराणा प्रताप स्कूल में छात्र प्रिंस सोनी की मौत के मामले को भी अपनी बातचीत का प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे के साथ ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए।
युवाओं ने स्कूल प्रशासन की जवाबदेही तय करने, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि अगर आज किसी दूसरे के बच्चे के साथ अन्याय हुआ है, तो कल ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है। इसलिए इस मामले को दबने नहीं दिया जाएगा और न्याय मिलने तक आवाज उठाई जाएगी।

‘गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही जिम्मेदारी’

युवाओं ने कहा कि नई पीढ़ी को अक्सर बेपरवाह और दिशाहीन बताया जाता है, लेकिन मौजूदा युवा स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि वे कैसा भारत चाहते हैं। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा देश चाहिए जो साफ, सुरक्षित, भ्रष्टाचार मुक्त हो और जहां सभी को समान अवसर मिले।
युवाओं ने पुलिस और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने तथा भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपना काम कराने के लिए रिश्वत देने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल

युवाओं ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि स्कूलों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल में बच्चे के साथ कोई गंभीर घटना होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और मामले में प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

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