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कफ सिरप कांड: राजस्थान में कफ सिरप ने एक और बच्चे की ली जान, अब तक तीन मौतें

Sat, 04 Oct 2025 09:16 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में खांसी की सिरप ने एक और बच्चे की जान ले ली। चुरू से रेफर होकर जयपुर आए 6 वर्षीय अनस की आज जेके लोन अस्पताल में मौत हो गई। 
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कफ सिरप कांड में राजस्थान में तीसरे बच्चे ने तोड़ा दम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में खांसी की दवा से बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताजा मामला चूरू जिले से जुड़ा है, जहां 6 साल के अनस नामक बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को गंभीर हालत में चूरू से जयपुर के जेके लोन अस्पताल रैफर किया गया था। बच्चे को बुधवार अल सुबह दिमागी बुखार की शिकायत के साथ भर्ती किया गया था, लेकिन सुबह 10 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक, अनस को 4-5 दिन पहले खांसी का सिरप दिया गया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। पहले चूरू के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन में हालत और खराब होने पर उसे जयपुर रेफर किया गया। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बच्चे को कौन सा सिरप दिया गया था और वह प्रतिबंधित सिरप की श्रेणी में आता था या नहीं। डॉक्टरों ने दिमागी बुखार को मौत की वजह बताया है, लेकिन खांसी की दवा से जुड़े मामलों की कड़ी में यह एक और संदिग्ध केस माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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प्रदेश में अब तक खांसी की दवा से मरने वाले बच्चों की संख्या 5 तक पहुंच चुकी है। इससे पहले भरतपुर और सीकर में सिरप पीने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। भरतपुर में बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब हो गई। इधर  चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कफ सिरप को लेकर मचे बवाल पर जोधपुर के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कफ सिरप की वजह से मौतें नहीं हुई हैं। हमने इसकी कमेटी से जांच करवा दी है। जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। दो बार दवा की जांच करवा चुके हैं। 
क्या कहते हैं चिकित्सक 
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ शिवानी स्वामी का कहना है कि अक्सर मरीज सीधे कैमिस्ट की दुकान पे जाते हैं और दवा खरीद लेते हैं, ऐसा करना गलत है. खांसी और जुकाम में उपयोग आने वाली दवा हमेशा चिकित्सक की सलाह से लेनी चाहिए. एडल्ट को दी जाने वाली दवा को बच्चों को देना शॉर्टकट इलाज नहीं, बल्कि गंभीर जोखिम है. इसलिए हर बार दवा देने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ही बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने का सबसे सही तरीका है। 

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