राजस्थान में मानसून की एंट्री जून के अंतिम सप्ताह में होगी। इसके बाद बारिश ठीक रही तो पेयजल संकट से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल की स्थिति यह है कि ज्यादातर शहरों में टैंकर्स से पानी की सप्लाई हो रही है। एक पानी के टैंकर की रेट 700 रुपए तक पहुंच चुकी है।
राज्य के बांधों की स्थिति
- चित्तौड़गढ़-राणा प्रताप सागर (गेज-मीटर) 352.81, (क्षमता-एमक्यूएम) 2905.23,
- (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 2026.21(प्रतिशत) 69.74%
- कोटा-कोटा बैराज (गेज-मीटर) 260.30, (क्षमता-एमक्यूएम) 112.06, (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 2026.21, (प्रतिशत) 69.74%
- कोटा-जवाहर सागर (गेज-मीटर) 298.70, (क्षमता-एमक्यूएम) 67.12, (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 54.05.21, (प्रतिशत) 80.53%
- टोंक-बीसलपुर बांध (गेज-मीटर) 315.50, (क्षमता-एमक्यूएम) 1095.06 (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 356.03, (प्रतिशत) 32.39.%
- दौसा-मौरेल डेम (गेज-मीटर) 9.14, (क्षमता-एमक्यूएम) 76.65 (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 15.20, (प्रतिशत) 19.83%
- धौलपुर-पावर्ती डेम (गेज-मीटर) 223.41, (क्षमता-एमक्यूएम) 120.88 (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 24.38, (प्रतिशत) 20.17%
- जयपुर-रामगढ़ (गेज-मीटर) 19.82, (क्षमता-एमक्यूएम) 75.02 (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 00.00, (प्रतिशत) 00.00%
- पाली- जवाई डेम (गेज-मीटर) 18.67, (क्षमता-एमक्यूएम) 207.51 (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 42.87, (प्रतिशत) 20.66%
- उदयपुर- जयसमंद (गेज-मीटर) 8.38, (क्षमता-एमक्यूएम) 415.13 (वर्तमान भराव-एमक्यूएम) 200.10, (प्रतिशत) 48.20%
राजस्थान के अलवर, अजमेर में जहां पानी की समस्या सबसे ज्यादा है, वहां मध्यम आकार के बांधों की स्थिति यह है। अलवर में जयसमंद, मंगलसर, सिलिसेड, जयसागर,मानसरोवर, शैली बेरी, बाबरिया, रामपुर,सारन खुर्द, देवती, खानपुर में कुल 6.87 क्यूसेक पानी बचा है जो इन बांधों की भराव क्षमता का 5.61% है। इसी तरह अजमेर में नारायण सागर, रामसागर, लसाड़िया, फूल सागर, वसुंदिनी, आना सागर, ताज सरोवर, लोरडी सागर, फाई सागर, गोविंदगढ़ और शिवसागर न्यारा में कुल 11.74 क्यूसेक पानी शेष बचा है जो इन बांधों की भराव क्षमता का 9.82% है।
कंटीजेंसी प्लान के ये हाल
राजस्थान में भीषण गर्मी में पानी की किल्लत कोढ़ में खाज का काम कर रही है। जनता के हलक भी सूखे हुए हैं। ऐसे में टैंकर माफिया मनमानी रेट पर पानी सप्लाई कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति पूर्वी राजस्थान की है। पेयजल सप्लाई करने के लिए सरकार ने जलदाय विभाग व कलेक्टरों को 175 करोड़ का समर कंटीजेंसी प्लान दिया, लेकिन कंटीजेंसी के 630 में से केवल 130 कार्य ही पूरे हो पाए है। समर कंटीजेंसी प्लान के 80 फीसदी काम बकाया है। नतीजा, पाइपलाइनों के टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
ट्यूबवेल बने लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं
प्रदेश में 1500 ट्यूबवेल बनाने में विभाग ने 70 करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं होने से जनता को पानी नहीं मिल रहा है। प्राइवेट टैंकर पानी की मनमानी कीमत वसूल रहे है।
सीएस की नाराजगी के बाद 31 मई तक पूरा करने का टारगेट
मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कंटिंजेंसी के काम 31 मई तक पूरा करने की डेटलाइन दी है। आकस्मिक कार्यों को सरकार ने मार्च के पहले सप्ताह में मंजूरी दे दी थी, लेकिन 20 फीसदी काम होने में ही 75 दिन लग गए।
समर कंटीजेंसी में कलेक्टर का रिपोर्ट कार्ड
सभी जिला कलेक्टर की अनुशंषा पर 358 आकस्मिक कार्यों के लिए सरकार ने 23.66 करोड़ मंजूर किए, लेकिन ढाई महीने बाद भई 123 काम बकाया है। सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, बांसवाड़ा, झालावाड़ व धौलपुर जिलों में सबसे कम प्रोग्रेस है। यहां जितने काम स्वीकृति हुए थे, वो सभी बकाया है।
इंजीनियरों के 90 फीसदी काम बाकी
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के लिए 138.33 करोड़ के 497 कार्य और शहरी क्षेत्र में 13 करोड़ के 21 कार्य स्वीकृत किए, लेकिन इसमें से केवल 48 ही काम पूर्ण हो पाए है। नागौर, जालौर, डीडवाना व जैसलमेर जिलों में सबसे कम प्रोग्रेस है। यहां स्वीकृत सभी काम बकाया पड़े है।
सरकार ने बजट दिया, लेकिन हैंडपंप व ट्यूबवेल से जनता को पानी नहीं
सरकार ने 1825 हैंडपंप के लिए 23.26 करोड़ और 573 ट्यूबवेल के लिए 53.80 करोड़ रुपए बजट दिया था। ट्यूबवेल बनाने में नागौर, अजमेर, डीडवाना, टोंक व जालौर का काम बहुत कम है। प्रदेश में 1500 ट्यूबवेल बन गए, लेकिन इनमें बिजली कनेक्शन नहीं होने की वजह से जनता को पानी नहीं मिल पा रहा है।