राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में जनजाति क्षेत्रीय विकास एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि सामाजिक न्याय और दलितों की बात पर लंबी-लंबी बातें करने वाली सरकार ने अपने घोषणा-पत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों से किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन हो या विधवा पेंशन या फिर दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन, इनका भुगतान पिछले कई महीनों से बकाया है।
प्रतिपक्ष के नेता जूली ने कहा कि सरकार पेंशन के जवाब पर हर बार अलग-अलग जवाब देती है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा बच्चियों के लिए स्कूटी दिए जाने की योजना शुरू की गई थी, आज करोड़ों रुपये की स्कूटी कबाड हो रही हैं और बालिकाएं इंतजार कर रही हैं। जबकि सरकार कह रही है कि हमने योजना को बंद नहीं किया है। प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि देश में आज भी दलितों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दलितों पर अत्याचार होने वाले राज्यों में यूपी के बाद राजस्थान में हर महीने तीन दलित और एक आदिवासी की हत्या हो रही है। उन्होंने कहा कि कुछ संभागों में तो स्थिति इससे भी बदतर है।
प्रतिपक्ष के नेता जूली ने कहा कि प्रदेश में आज भी दलितों के दूल्हों की बारात पुलिस के संरक्षण में निकाली जाती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारी मानसिकता दोषी है। जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक इसका समाधान निकाला जाना मुश्किल है। आज प्रदेश में सामाजिक समरसता और सौहार्द को बढ़ाए जाने की जरूरत है, ताकि लोगों का सोच बदले। पिछले डेढ़ वर्षों में दलितों पर अत्याचार की स्थिति को देखें तो प्रदेश के सरकारी कार्यालयों और विद्यालयों में कार्यरत दलित अधिकारी और कर्मचारियों के साथ जातीय द्वेषता बढ़ी है। प्रदेश में घटी दलित अत्याचार और हत्या की घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए जूली ने कहा कि उन्हें प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा है, जिनमें से कई मामलों में तो प्रताड़ित हुए लोगों को मानसिक अवसाद की स्थिति में आत्महत्या तक करने को मजबूर होना पड़ा है।
जूली ने दलितों पर हो रहे अत्याचारों के कई उदाहरण देते हुए बताया कि एससी-एसटी के लोगों को आए दिन जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया जाता रहा है और उन पर आपसी समझौता करने के लिए दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि एससी के मामले में केवल 43 प्रतिशत ही कार्रवाई होती है और एसटी के मामले में तो यह प्रतिशत 40 ही रह गया है। आज 75 वर्षों के बाद भी सभी लोगों ने प्रयास किए हो, चाहे सत्ता पक्ष या प्रतिपक्ष सरकार में रहे हो। लेकिन जहां तक इन वर्गों को लाभ मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल सका। मात्र सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन की बात हम समझते हैं। उन्होंने कहा कि रिजर्वेशन के लिए रोस्टर रजिस्टर का संधारण तक नहीं किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने ऑर्डर निकाल रखे हैं, लेकिन इसकी पालना नहीं होती।