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Rajasthan Tiger: कान्हा में पांच बाघों की मौत के बाद राजस्थान अलर्ट मोड पर, सरिस्का-रणथंभौर में निगरानी बढ़ी

Fri, 22 May 2026 07:32 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan Tiger: कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से पांच बाघों की मौत के बाद राजस्थान अलर्ट मोड पर है। रणथंभौर और सरिस्का में निगरानी बढ़ाई गई है। वन विभाग आवारा कुत्तों के टीकाकरण, सैनिटाइजेशन और वन्यजीवों की सतत मॉनिटरिंग पर जोर दे रहा है।

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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से पांच बाघों की मौत के बाद राजस्थान वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए राज्य के टाइगर रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्रों में निगरानी तथा एहतियाती उपाय तेज कर दिए गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरिस्का टाइगर रिजर्व और रणथंभौर नेशनल पार्क सहित प्रमुख बाघ अभयारण्यों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इन दोनों संरक्षित क्षेत्रों में फिलहाल 100 से अधिक बाघ मौजूद हैं।

वन विभाग ने जंगलों के आसपास के गांवों में सैनिटाइजेशन अभियान शुरू किया है। साथ ही आवारा कुत्तों के टीकाकरण और स्वच्छता संबंधी उपायों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय बढ़ाया है। गांवों और वनकर्मियों के लिए जागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि वन क्षेत्रों में पानी के स्रोतों और वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी बीमार, घायल या मृत जानवर की तुरंत पहचान की जा सके। चिड़ियाघरों और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में भी स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है।

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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने हाल ही में सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर टाइगर रिजर्व के आसपास आवारा कुत्तों के टीकाकरण और इम्यूनाइजेशन बफर जोन बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य घरेलू जानवरों से वन्यजीवों में संक्रमण फैलने से रोकना है।

कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी कितनी खतरनाक है?

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित कुत्तों के जरिए फैलती है। यह जानवरों के श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है और कई मामलों में बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के लिए घातक साबित हुई है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते संक्रमण की पहचान नहीं हुई तो यह जंगलों में तेजी से फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार आवारा कुत्तों का टीकाकरण और वन क्षेत्रों में लगातार निगरानी ही इस वायरस को बाघों और अन्य वन्यजीवों तक पहुंचने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

 

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