पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के अंतिम समय में प्रदेश में बनाए गए 17 नए जिले और 3 संभागों का भविष्य क्या होगा? इसके लिए राज्य सरकार की ओर से गठित उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार मंत्रिमंडलीय उप समिति को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
एक जुलाई को इस उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर नए जिलों और संभागों की समीक्षा का काम दिया गया था। इसमें प्रशासनिक दृष्टिगत क्षेत्राधिकार, सुचारू संचालन, प्रशासनिक आवश्यकता तथा वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर नए जिलों और संभागों की आवश्यकता का आंकलन किया जाना था।
समिति में ये अफसर थे शामिल
इस पांच सदस्यीय समिति को 31 अगस्त तक राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन तय तिथि से एक दिन पहले ही समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। समिति में अध्यक्ष सहित पांच आईएएस अफसर शामिल किए गए थे...
- सेवानिवृत्त आईएएस ललित के पंवार- अध्यक्ष
- अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त- सदस्य
- अतिरिक्त मुख्य सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज- सदस्य
- अतिरिक्त मुख्य सचिव- गृह विभाग
- प्रमुख शासन सचिव- राजस्व विभाग
नवगठित जिलों और संभागों के नाम
तीन नए संभागों में सीकर, पाली और बांसवाड़ा शामिल हैं। वहीं, नए जिलों में नीमकाथाना, सांचौर, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल, अनूपगढ़, ब्यावर, केकड़ी, डीडवाना-कुचामन, शाहपुरा, डीग, गंगापुरसिटी, जोधपुर शहर, जोधपुर ग्रामीण, फलौदी, बालोतरा और सलूंबर शामिल। हालांकि जयपुर ग्रामीण तथा जोधपुर ग्रामीण को पिछली सरकार ने अलग जिला तो घोषित कर दिया था लेकिन प्रशासनिक रूप से इनका कलेक्ट्रेट नहीं बनाया गया था। इसलिए कमेटी ने इनको छोड़ शेष 17 जिलों पर ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
कमेटी के चेयरमैन ललित के पंवार से बातचीत...
सवाल: नव गठित जिलों और संभागों को लेकर क्या उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है?
जवाब: कमेटी को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट मंत्रिमंडलीय उप समिति को सौंपनी थी। हमने एक दिन पहले ही यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
सवाल: नए जिलों और संभागों की समीक्षा का क्या आधार रखा गया है?
जवाब: सरकार ने अपने आदेश में इसके लिए टर्म्स निर्धारित कर दी थीं। इसमें प्रशासनिक दृष्टिगत क्षेत्राधिकार, सुचारू संचालन, प्रशासनिक आवश्यकता तथा वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान रखा गया है।
सवाल: इस आधार कमेटी ने कितने जिलों को मापदंड के अनुसार पाया है?
जवाब: रिपोर्ट गोपनीय है। इसलिए इसका जवाब अब सरकार ही दे सकती है। हमने अपनी तरफ से सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है।
सवाल: वित्तीय आवश्यकता के आधार पर प्रति जिले के लिए न्यूनतम कितना खर्च जरूरी माना गया है।
जवाब: इसमें प्रति जिले के लिए संचालन के लिए एक हजार करोड़ से अधिक की आवश्यकता होगी।