राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणाओं को लागू नहीं करने और कर्मचारियों की लंबित मांगों की लगातार अनदेखी से नाराज होकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने आगामी 20 अक्टूबर को ‘काली दिवाली’ मनाने की चेतावनी दी है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बजट में घोषित लाभों की क्रियान्विति, लंबित वेतन विसंगतियों का निपटान, पदोन्नतियों में विलंब और परिवीक्षाकाल में भत्तों की बहाली जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। इन मांगों पर अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
राठौड़ ने कहा कि इस मुद्दे पर कर्मचारियों ने पहले भी सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी। इसी सिलसिले में महासंघ ने 24 सितंबर 2025 को प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के सचिव शिखर अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन उस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
महासंघ ने अब तय किया है कि 15 अक्तूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टरों को सौंपा जाएगा। इसके बाद यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो 20 अक्तूबर को ‘काली दिवाली’ मनाई जाएगी।
राठौड़ ने कहा कि सरकार यदि कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करना चाहती है, तो दिवाली से पहले बोनस का शीघ्र नकद भुगतान सुनिश्चित करे और बोनस की राशि में बढ़ोतरी की जाए। साथ ही परिवीक्षाकाल में कार्यरत कर्मचारियों को भी बोनस दिया जाए।
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मुख्य सचिव सुधांशु पंत को दिए गए ज्ञापन में इन सभी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। ज्ञापन देने वाले शिष्टमंडल में गजेंद्र सिंह राठौड़, कुलदीप यादव, देवेंद्र सिंह नरूका, मोहनलाल शर्मा, नरपत सिंह, अजयवीर सिंह, शिवकुमार, ओम प्रकाश चौधरी और शहीदुद्दीन सहित कई कर्मचारी नेता शामिल रहे।
महासंघ ने सरकार को आगाह किया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे राज्यभर के कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।
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