फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajasthan Rajya Sabha Election: नीरज डांगी पर बार-बार दांव, कांग्रेस ने संदेश दिया या मौका गंवा दिया?

सार

राजस्थान राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाकर संगठन के भरोसेमंद चेहरे पर दांव लगाया है। हालांकि उनके चयन के बाद सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए चेहरों को अवसर देने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
नीरज डांगी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। कांग्रेस ने एक बार फिर नीरज डांगी पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। हालांकि इस निर्णय के बाद पार्टी की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने नए चेहरे या किसी अन्य सामाजिक वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के बजाय पुराने और भरोसेमंद चेहरे को प्राथमिकता दी है।

विज्ञापन


कांग्रेस ने फिर नीरज डांगी को बनाया उम्मीदवार

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए एक बार फिर नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया है। राजस्थान में पहले से ही नेता प्रतिपक्ष का पद दलित समुदाय के नेता टीकाराम जूली के पास है और उन्हें कांग्रेस का बड़ा दलित चेहरा माना जाता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नीरज डांगी को बड़े जनाधार वाला नेता नहीं माना जाता। पार्टी ने उन्हें वर्ष 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में रेवदर से टिकट दिया था, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद कांग्रेस ने वर्ष 2020 में उन्हें राज्यसभा भेजा और अब 2026 में भी उन पर भरोसा जताया है।

बीजेपी ने जातीय समीकरण साधने की कोशिश की

दूसरी ओर सत्तारूढ़ भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का टिकट काटकर राजस्थान की दो प्रभावशाली जातियों—जाट और गुर्जर समुदाय—को साधने का प्रयास किया है।

विज्ञापन

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा का यह कदम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। जाट और गुर्जर समुदाय राजस्थान की कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखते हैं और भाजपा इन्हें अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस की रणनीति पर उठ रहे सवाल

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की बात करने वाली कांग्रेस के पास क्या कोई दूसरा विकल्प नहीं था। आलोचकों का कहना है कि पार्टी ने न तो कोई नया सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश की और न ही किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाया। हालांकि कांग्रेस के भीतर माना जा रहा है कि नीरज डांगी का चयन संगठन में उनकी स्वीकार्यता और केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे का परिणाम है।

डांगी पर भरोसे की वजह क्या है?

सूत्रों के अनुसार टिकट की घोषणा से कुछ दिन पहले नीरज डांगी ने जयपुर पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की थी।
कांग्रेस के भीतर यह धारणा है कि डांगी को केवल गहलोत खेमे का ही समर्थन नहीं मिला, बल्कि उन्होंने दिल्ली में भी अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। यही कारण माना जा रहा है कि उनके नाम को लेकर पार्टी के भीतर किसी बड़े विरोध की स्थिति नहीं बनी और टिकट लगभग निर्विरोध रूप से तय हो गया।

आने वाले चुनावों के लिए अहम संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार चयन से दोनों दलों की चुनावी रणनीति साफ झलक रही है। जहां भाजपा जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटी दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस ने संगठन के भरोसेमंद चेहरे को प्राथमिकता दी है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव का यह फैसला आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है।

शुक्रवार को भरा नामांकन

कांग्रेस उम्मीदवार नीरज डांगी ने शुक्रवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे। कांग्रेस ने डांगी को लगातार दूसरी बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा में पार्टी के पर्याप्त संख्या बल को देखते हुए उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। डांगी इससे पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें