सोलर कंपनियों के आरोपों के बाद राज्य सरकार के आदेश पर शिव के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर भाटी समर्थकों में जबरदस्त रोष है। विधायक भाटी ने भी इशारों ही इशारों में राज्य सरकार के खिलाफ स्वयं के प्रति इस रुख पर कोर्ट में दस्तक देने के संकेत दिए हैं।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी के खिलाफ एफआईआर के मुद्दे से कड़ाके की सर्दी के दौर में भी सरहद की सियासत गरमा गई है। भाटी समर्थक इस घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न माध्यमों से अपनी कड़ी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि एफआईआर में जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, उनको लेकर समर्थकों का कहना है कि राज्य सरकार रविंद्र सिंह भाटी को जनहित के मुद्दे उठाने पर बेवजह टारगेट कर रही है। जबकि विधायक की ओर से अभी तक उठाए गए किसी भी मुद्दे से उनको कोई निजी स्वार्थ नहीं जुड़ा है। गौरतलब है कि विधायक बनने के बाद रविंद्र सिंह भाटी पर तीसरा मुकदमा दर्ज हुआ है। भाटी ने ताजा मुकदमे के खिलाफ कोर्ट की शरण लेने का मानस बना लिया है।
सत्तापक्ष एवं विपक्ष के कई प्रभावशाली लोग कर चुके विरोध
गोचर-ओरण भूमि बचाने, अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सोलर प्रोजेक्ट वाले जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों में आए दिन विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद टाटा, अदाणी और कई बड़े ग्रुप इन क्षेत्रों में सोलर सेक्टर में निवेश कर रहे हैं। हाल ही में जयपुर में इन्वेस्टमेंट समिट में प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक नए सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए 26 हजार करोड़ का निवेश किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। इनमें से अकेले 20 हजार करोड़ तो बीकानेर जिले शेष बाड़मेर और जैसलमेर जिले में निवेश में देश के बड़े ग्रुप रुचि दिखा रहे हैं।
विशेष बात यह है कि करीब तीन जिलों में इन प्रोजेक्टस के विरोध में कई रसूखदार सत्तापक्ष एवं विपक्ष के लोग आंदोलन में शामिल हुए। लेकिन शिव के निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी पर ही सोलर कंपनियों की शिकायत पर एफआईआर की गई।
रविंद्र सिंह भाटी का परिवार
बाड़मेर के छोटे से गांव दूधोड़ा के रहने वाले रविंद्र सिंह भाटी बेहद सामान्य परिवार से आते हैं। उनके पिता शिक्षक हैं। भाटी के परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहा है। रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के पास स्थित सरकारी स्कूल से ली। फिर बाड़मेर शहर के एक स्कूल से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की। वह उच्च शिक्षा के लिए जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहीं पर उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में छात्र राजनीति में कदम रखा। भाटी ने ग्रेजुएशन के बाद वकालत की पढ़ाई पूरी की।
कब आए चर्चा में
रविंद्र सिंह भाटी तब और चर्चा में आ गए, जब उन्होंने 2022 में अपने दोस्त अरविंद सिंह भाटी को जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष का चुनाव जितवाया। एनएसयूआई ने अरविंद को टिकट नहीं दिया तो, वह SFI से चुनाव लड़े. रविंद्र भाटी ने अपने दोस्त अरविंद के चुनाव प्रचार का जिम्मा खुद अपने कंधों पर उठाया, और अध्यक्ष पद के लिए हुए इलेक्शन में जीत भी दिलाई।
रविंद्र भाटी के अब तक के प्रमुख आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन
- बालोतरा में पुलिस की कथित बर्बरता के खिलाफ भाटी ने पिछले वर्ष एक बड़ा धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था, जिससे कि आंदोलन और ज्यादा उग्र हो गया था और आखिरकार स्थानीय प्रशासन को रविंद्र भाटी एवं उनके समर्थकों की मांगें माननी पड़ी थी।
- जैसलमेर के बईया गांव में पिछले वर्ष के अंतिम महीनों में सोलर कंपनियों की ओर से भूमि अधिग्रहण के मसले पर शिव के निर्दलीय विधायक नाराज ग्र्रामीणों के पक्ष में आंदोलन पर उतर आए थे। इस आंदोलन में भी गौवंश के लिए बईया की ओरण और गोचर भूमि को बचाने में उनकी मांगों पर प्रशासन को एक्शन लेना पड़ा।
- हाल ही में बीते दिसंबर माह में बाड़मेर जिले के शिव उपखंड क्षेत्र के हड़वा क्षेत्र में सोलर कंपनियों के किसानों की जमीन अधिग्रहण के मामले में विधायक रविंद्र भाटी ने अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की मांगों का समर्थन किया। इस आंदोलन में भी उनको बड़ी सफलता मिली। लेकिन इसकी प्रतिक्रिया में सोलर कंपनियों की ओर से राज्य सरकार को की गई शिकायत पर भाटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।