राजस्थान में पंचायती राज चुनाव को लेकर छिड़ी बहस
- फोटो : Amar Ujala
राजस्थान में पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले भरतपुर-धौलपुर-डीग जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक एवं किसान नेता नेमसिंह फौजदार ने आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में वापसी कर ली है। जयपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करवाई। पूर्व मंत्री और पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह द्वारा कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व पर उठाए गए सवालों के बीच इस सियासी घटनाक्रम को भरतपुर संभाग की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्वेंद्र सिंह से बयानबाजी के कारण चर्चित
नेमसिंह फौजदार की पार्टी में वापसी से पहले उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सार्वजनिक मंच से नेमसिंह पर तीखी टिप्पणी की, जिससे दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बयानबाजी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस आलाकमान ने विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। भरतपुर की राजनीति में विश्वेंद्र सिंह और नेमसिंह फौजदार का रिश्ता कभी गुरु और शिष्य का हुआ करता था। वर्ष 1990 और 2000 के दशक में हुए जाट आरक्षण आंदोलनों के दौरान विश्वेंद्र सिंह ने नेमसिंह पर दर्ज मुकदमों की कानूनी जिम्मेदारी खुद पर ली थी। हालांकि, समय के साथ नेमसिंह द्वारा स्थानीय स्तर पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने से दोनों के बीच दूरियां बढ़ती गईं।
हुंकार सभा से बढ़ा टकराव
दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद तब अधिक गहरा गए, जब नेमसिंह फौजदार ने भरतपुर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल को आमंत्रित कर एक बड़ी जाट हुंकार सभा का आयोजन किया था। इसे विश्वेंद्र सिंह के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में सीधे नेतृत्व की चुनौती के रूप में देखा गया। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ वीडियो जारी कर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के माध्यम से युवाओं और किसानों के बीच पकड़ रखने वाले नेता को साथ लाकर कांग्रेस आगामी चुनावों में ध्रुवीकरण के असर को नियंत्रित करना चाहती है।
ये भी पढ़ें-
राजस्थान: निकाय चुनाव में चूकी कांग्रेस, अब पंचायत चुनाव में गहलोत-पायलट समेत दिग्गजों को उतारा
छात्र राजनीति से अब तक का सफर
नेमसिंह फौजदार का राजनीतिक सफर वर्ष 1998 में एनएसयूआई के टिकट पर छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ने से शुरू हुआ था। वर्ष 2000 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर और वर्ष 2005 में निर्दलीय रूप से जिला परिषद का चुनाव लड़ा। वर्ष 2003 में डीग विधानसभा सीट से उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। इसके बाद वर्ष 2008 और 2013 में उन्होंने नगर विधानसभा सीट से क्रमशः राजस्थान विकास पार्टी और फिर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। वर्ष 2015 में वे कांग्रेस के समर्थन से जिला परिषद सदस्य निर्वाचित हुए थे। वे भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा में प्रदेश प्रवक्ता भी रहे, लेकिन नगर सीट से टिकट नहीं मिलने पर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी और आरएलपी के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे।