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राजस्थान: पुलिस के डेटाबेस में सेंधमारी, 70 हजार नागरिकों के रिकॉर्ड और 59,460 मोबाइल नंबर लीक होने की आशंका

Thu, 22 Oct 2026 02:12 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जयपुर

सार

राजस्थान पुलिस के संवेदनशील डेटाबेस में सेंधमारी का दावा सामने आने के बाद साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की विशेष टीम जांच कर रही है। हैकर समूह ‘स्कार्लेटग्रुप’ ने ब्रीचफोरम्स पर करीब सात जीबी डेटा होने और उसे बेचने की पेशकश का दावा किया है।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : AdobeStock
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विस्तार
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राजस्थान पुलिस के संवेदनशील डेटाबेस में सेंधमारी का दावा सामने आने के बाद पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं। कुख्यात हैकर समूह ‘स्कार्लेटग्रुप’ ने डार्कनेट पर राजस्थान पुलिस से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा हासिल करने और उसे बेचने की पेशकश की है। समूह के दावे के मुताबिक, कथित रूप से लीक डेटा में करीब 70 हजार नागरिकों के पहचान संबंधी रिकॉर्ड, 59,460 मोबाइल नंबर और कई अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। हालांकि, अभी तक डेटा लीक होने की वास्तविकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद राजस्थान पुलिस के साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की विशेष टीम ने जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की मदद से भी कथित डेटा लीक से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि पुलिस के किसी सर्वर या नेटवर्क में वास्तव में सेंधमारी हुई है या हैकर समूह ने केवल दावा किया है।

ब्रीचफोरम्स पर पोस्ट कर सात जीबी डेटा होने का दावा

हैकर समूह स्कार्लेटग्रुप ने चर्चित ऑनलाइन मंच ‘ब्रीचफोरम्स’ पर कथित डेटा सेंधमारी को लेकर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। इसमें समूह ने राजस्थान पुलिस के मुख्य डेटाबेस तक सीधी पहुंच बनाने और उससे जुड़ा डेटा संभावित खरीदारों को उपलब्ध कराने का दावा किया है। समूह के मुताबिक, उसके पास करीब सात जीबी डेटा मौजूद है। हालांकि, केवल हैकर समूह की ऑनलाइन पोस्ट के आधार पर डेटा की प्रामाणिकता या उसके वास्तविक स्रोत की पुष्टि नहीं की जा सकती। राजस्थान पुलिस का साइबर महकमा इस बात की जांच कर रहा है कि क्या किसी सर्वर या डिजिटल नेटवर्क में सेंधमारी हुई है या यह दावा महज ध्यान आकर्षित करने अथवा भ्रम फैलाने की कोशिश है।

एफआईआर, ई-केवाईसी और गवाहों के बयानों का डेटा होने का दावा

स्कार्लेटग्रुप ने दावा किया है कि उसके पास राजस्थान पुलिस के साइबर नेटवर्क से कथित तौर पर चुराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर), इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (ई-केवाईसी) रिकॉर्ड और विभिन्न मामलों में दर्ज गवाहों के बयानों से संबंधित संवेदनशील जानकारी है। इसके अलावा, हैकर समूह ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के आधिकारिक ईमेल खातों से जुड़ा गोपनीय डेटा भी अपने पास होने की बात कही है। यदि जांच में इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह पुलिस विभाग की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए गंभीर मामला हो सकता है। साथ ही, इससे आम नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।

साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की संयुक्त टीम कर रही जांच

साइबर अपराध के पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरा ने बताया कि स्कार्लेटग्रुप ने डार्कनेट के माध्यम से पुलिस का डेटा लीक करने का दावा किया है। समूह ने राजस्थान पुलिस से जुड़ी किसी अन्य संबद्ध एजेंसी का डेटा चोरी करने की बात भी कही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजस्थान पुलिस के साइबर कमांडो और पुलिस मुख्यालय की संयुक्त टीम तकनीकी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। इसके साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से हैकर समूह के डिजिटल पदचिह्नों को ट्रैक करने और कथित डेटा के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी डेटा लीक की वास्तविकता

पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरा के अनुसार, जांच दल हैकर समूह के दावों की सत्यता और डेटा के वास्तविक स्रोत का पता लगाने में जुटा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में डेटा चोरी हुआ है या समूह ने सनसनी फैलाने के लिए ऐसा दावा किया है।

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अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही कथित डेटा लीक की वास्तविक स्थिति, प्रभावित डेटा का संभावित दायरा और साइबर सुरक्षा में किसी चूक की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जांच एजेंसियां उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी पहलुओं के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

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