राजस्थान में तीसरे चरण के पंचायत चुनाव के नतीजों ने गांवों की सियासत की कई तस्वीरें सामने रखीं। कहीं राजनीतिक परिवारों से जुड़े उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की तो कहीं आम परिवारों से आने वाले प्रत्याशियों ने स्थापित चेहरों को पीछे छोड़ दिया। कुछ गांवों में मुकाबला इतना करीबी रहा कि जीत-हार का फैसला महज एक वोट से हुआ। वहीं, मतगणना के दौरान विवाद, पथराव और आगजनी की घटनाओं ने भी चुनाव परिणामों को चर्चा में ला दिया।
गुरुवार को तीसरे चरण में 3716 ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान हुआ। देर रात तक नतीजे घोषित होते रहे। इन परिणामों में राजनीतिक रसूख, स्थानीय पहचान, व्यक्तिगत संघर्ष और गांवों के स्तर पर बदलते चुनावी समीकरण देखने को मिले। शुक्रवार को अब इन ग्राम पंचायतों में उपसरपंच चुने जाएंगे।
राजनीतिक परिवारों में कहीं खुशी, कहीं निराशा
सरपंच चुनाव में कई जगह राजनीतिक और प्रभावशाली परिवारों के सदस्यों ने जीत दर्ज की। टोंक जिले के देवली में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज की पत्नी शोभा भारद्वाज सरपंच चुनी गईं। उन्होंने मंजू को 124 वोटों से हराया।
चित्तौड़गढ़ जिले की आक्या ग्राम पंचायत में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की चाची टम्मा कंवर ने जीत हासिल की। दूसरी ओर, उदयपुर जिले के खेरवाड़ा में कांग्रेस विधायक दयाराम परमार के भाई की पत्नी और पूर्व प्रधान कमला परमार को हार का सामना करना पड़ा।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अफसर की पत्नी बनी सरपंच
दौसा की गनीपुर ग्राम पंचायत में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी धर्म सिंह मीणा की पत्नी मौसम मीणा सरपंच चुनी गईं। सांचौर विधायक जीवाराम चौधरी के निजी सचिव डॉ. नरसीराम चौधरी की मां वेजी देवी ने भी डबाल गांव से चुनाव जीत लिया।
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छह करोड़पति उम्मीदवारों को हराकर जीतीं शारदा
जालोर जिले की भैंसवाड़ा ग्राम पंचायत का चुनाव परिणाम खास चर्चा में रहा। यहां शारदा कुमारी राणा ने छह करोड़पति उम्मीदवारों को हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। उन्हें 650 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी उमा कुमारी को 461 वोट मिले। शारदा ने 189 वोटों से जीत हासिल की।
बीए-बीएड तक पढ़ाई कर चुकीं शारदा का सपना शिक्षक बनने का था। शिक्षक भर्ती रद्द होने के बाद उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया। अब गांव के लोगों ने उन्हें सरपंच चुना है।
जालोर की ही कुंभिया ग्राम पंचायत में छगनलाल भील ने नायब तहसीलदार विरमाराम की पत्नी उगम देवी को 13 वोटों से हरा दिया। हनुमानगढ़ जिले की ढाणी लालखां ग्राम पंचायत में राजबाला ने 327 वोटों से जीत दर्ज की। वहीं, चित्तौड़गढ़ की पंचदेवला ग्राम पंचायत में नारायण भील निर्विरोध सरपंच चुने गए।
कहीं एक वोट से फैसला, कहीं दोबारा मतगणना
कई ग्राम पंचायतों में मुकाबला बेहद करीबी रहा। भरतपुर जिले की बयाना पंचायत समिति की दर्र बराहना ग्राम पंचायत में दो बार मतगणना के बाद विमला कुमारी को एक वोट से विजेता घोषित किया गया। हालांकि, दूसरे प्रत्याशी के समर्थकों ने तीन वोट कम गिनने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसके बाद एसडीएम अलका श्रीवास्तव की मौजूदगी में एसडीएम कार्यालय में दोबारा मतगणना कराने का निर्णय लिया गया। दौसा जिले के बड़ोली मतदान केंद्र पर मतपेटी की सील टूटी मिलने के आरोप के बाद विवाद हुआ।
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नतीजे घोषित होते ही बिगड़े हालात, पथराव और आगजनी
उदयपुर जिले की खेरवाड़ा पंचायत समिति की नवाघरा ग्राम पंचायत में नतीजे घोषित होने के बाद हिंसा हुई। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे पुष्पादेवी को विजेता घोषित किया गया। इसके बाद हारे हुए प्रत्याशी के समर्थकों ने मतगणना स्थल पर पथराव और आगजनी कर दी। परिसर में खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू पाया।
राजस्थान की सबसे छोटी ग्राम पंचायत को मिला पहला सरपंच
टोंक जिले की बीसलपुर ग्राम पंचायत को पहली बार सरपंच मिला। इसे राजस्थान की सबसे छोटी ग्राम पंचायत बताया जा रहा है। यहां नौसर देवी भील ने 151 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने बीना देवी मीणा को 93 वोटों से हराया। इस पंचायत में कुल 294 मतदाता हैं।
आज चुने जाएंगे उपसरपंच
तीसरे चरण में पंच और सरपंच पदों के चुनाव के बाद शुक्रवार को ग्राम पंचायतों में उपसरपंच का चुनाव होगा। इसके लिए निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। चित्तौड़गढ़ जिले की राशमी पंचायत समिति की अड़ाना ग्राम पंचायत के वार्ड तीन में पंच पद के लिए दोबारा मतदान भी होगा। मतपत्र में एक प्रत्याशी का नाम नहीं होने के कारण निर्वाचन अधिकारी ने पुनर्मतदान के आदेश दिए हैं। यहां 16 नवंबर को वोटिंग होगी।