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राजस्थान निकाय चुनाव के कई रंग: छापे-नोटिस-गिरफ्तारी और आधी रात में कोर्ट, जानें चुनाव मैनेजमेंट की पूरी कहानी

Tue, 22 Sep 2026 03:27 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan: राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा ने 301 अध्यक्ष-मेयर पदों में 197 पर जीत दर्ज की, लेकिन कई जगह चुनावी गणित बदला। गिरफ्तारी की आशंका और मतदान अधिकार के विवाद में कांग्रेस व निर्दलीय हाईकोर्ट पहुंचे। केकड़ी और कुचेरा में कोर्ट की राहत के बाद कांग्रेस जीती।

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राजस्थान निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के निकाय चुनाव में भाजपा ने पार्षदों के नतीजों के मुकाबले अध्यक्ष और मेयर की कुर्सियों पर कहीं ज्यादा बढ़त बनाई। 10,244 वार्डों में भाजपा ने 4,182 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,619 और निर्दलीयों के खाते में 2,273 सीटें गईं। इसके बाद अध्यक्ष, सभापति और मेयर के अब तक घोषित 301 नतीजों में भाजपा ने 197 पदों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को 94 पद मिले।

इन नतीजों ने यह साफ किया कि निकायों में बोर्ड बनाने के लिए केवल पार्षदों की संख्या ही निर्णायक नहीं रही। कई जगह बहुमत से दूर होने के बावजूद भाजपा का बोर्ड बना। वहीं कई ऐसे निकाय भी रहे, जहां कांग्रेस या निर्दलीय पार्षदों की संख्या अधिक होने के बावजूद भाजपा ने सत्ता हासिल की।

लेकिन इस चुनाव की कहानी का दूसरा पहलू भी है। कई जगह कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों तथा प्रत्याशियों ने गिरफ्तारी की आशंका, पुलिस कार्रवाई, मतदान के अधिकार और पार्षदों को कथित तौर पर रोकने जैसे मामलों को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कुछ मामलों में अदालत ने तत्काल राहत दी और चुनाव प्रक्रिया में पार्षदों के मतदान के अधिकार को लेकर हस्तक्षेप किया।

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कुचेरा, केकड़ी, तिजारा, बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीविजयनगर जैसे निकायों में चुनाव से ठीक पहले कानूनी लड़ाई सामने आई। कहीं गिरफ्तारी पर रोक लगी, कहीं पार्षदों के मतदान के अधिकार को लेकर अदालत पहुंचना पड़ा और कहीं नतीजों पर रोक लगा दी गई। इन घटनाक्रमों ने निकाय चुनाव को महज पार्षदों की संख्या का खेल नहीं रहने दिया।

इतिहास में पहली बार आधी रात तक हाईकोर्ट में सुनवाई
निकाय चुनाव की लड़ाई जब गिरफ्तारी की आशंका और मतदान के अधिकार तक पहुंची तो राजस्थान हाईकोर्ट में छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई हुई। रविवार 20 सितंबर की रात कई मामलों में विशेष पीठों ने सुनवाई की। बीकानेर के कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद और हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों समेत कई मामलों में गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत दी गई। एक मामले में सुनवाई रात करीब 10 बजे शुरू होकर आधी रात के बाद करीब दो बजे तक चली। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम रहा क्योंकि सोमवार 21 सितंबर को कई निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव होने थे। ऐसे में अदालत के आदेश सीधे तौर पर उन पार्षदों के चुनाव में शामिल होने की संभावना से जुड़े थे।

पढ़ें:  मेयर के बाद अब किसका चलेगा नंबर गेम? अजमेर-पाली से भरतपुर तक निर्दलीय अहम

कोर्ट पहुंचे निकायों में क्या हुआ?

  • केकड़ी नगरपालिका में कांग्रेस के 20, भाजपा के 18 और आरएलपी के दो पार्षद हैं।
  • कुल 40 वार्डों में बहुमत का आंकड़ा 21 है।
  • अध्यक्ष चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस प्रत्याशी अनिल मित्तल पर भाजपा पार्षद ने वोट के बदले धन देने का आरोप लगाते हुए शिकायत की।
  • मित्तल ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
  • छुट्टी के दिन हुई सुनवाई में अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ गिरफ्तारी समेत दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।
  • इसके बाद मित्तल चुनाव में शामिल हुए और कांग्रेस के 20, भाजपा के 18 तथा आरएलपी के दो पार्षदों वाले बोर्ड में भाजपा के विनीत जैन को 21-19 से हराकर अध्यक्ष चुने गए।

कुचेरा नगरपालिका: गिरफ्तारी पर रोक के बाद कांग्रेस की जीत
कुचेरा नगरपालिका में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और निर्दलीय के पांच पार्षद हैं। कुल 25 वार्डों में बहुमत का आंकड़ा 13 है। कांग्रेस के तेजपाल मिर्धा के खिलाफ चुनाव से ठीक पहले एसीबी की एफआईआर दर्ज हुई। मिर्धा ने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। छुट्टी के दिन हुई सुनवाई में अदालत ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद मिर्धा ने चुनाव लड़ा और 13 वोट हासिल कर अध्यक्ष चुने गए। इस तरह कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों के साथ जरूरी एक अतिरिक्त वोट जुटाकर बोर्ड अपने पक्ष में कर लिया।


तिजारा नगर परिषद: 31 निर्दलीयों के बीच कांग्रेस ने दो वोट से बाजी मारी
तिजारा नगर परिषद के 35 वार्डों में 31 निर्दलीय, तीन भाजपा और एक कांग्रेस पार्षद जीता। बहुमत का आंकड़ा 18 है। कांग्रेस प्रत्याशी रामावतार सैनी ने भाजपा के सुभाष सैनी को 18-16 से हराया। एक वोट अवैध रहा। कांग्रेस समर्थक पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने के आरोपों के बीच मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने चुनाव टालने से इनकार किया, लेकिन पार्षदों के मतदान के अधिकार पर जोर दिया। इसके बाद मतदान का समय रात 10 बजे तक बढ़ाया गया।

हनुमानगढ़: नौ निर्दलीय पार्षद हाईकोर्ट पहुंचे, निर्दलीय का बोर्ड
60 सदस्यीय हनुमानगढ़ परिषद में 34 निर्दलीय, 15 भाजपा, 10 कांग्रेस और एक माकपा पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 31 है। चुनाव से ठीक पहले निर्दलीय विधायक गणेश राज बंसल की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक नौ निर्दलीय पार्षदों ने भी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत से उन्हें अंतरिम राहत मिली। इसके बाद बंसल समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी मंजू रिणवा 35 वोट लेकर सभापति चुनी गईं। भाजपा को 16 और कांग्रेस को नौ वोट मिले।

श्रीविजयनगर: हाईकोर्ट ने एसपी को तलब किया, नतीजे होल्ड
श्रीविजयनगर नगरपालिका में कांग्रेस के 11, भाजपा के 10 और निर्दलीय के चार पार्षद हैं। कुल 25 वार्डों में बहुमत के लिए 13 वोट जरूरी हैं। यहां कुछ पार्षदों को कथित तौर पर अगवा किए जाने के आरोपों के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने एसपी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए तलब किया और पार्षदों को मतदान कराने के निर्देश दिए। पुलिस ने बाद में पार्षदों को बरामद कर मतदान कराया। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने नतीजों पर 28 सितंबर तक रोक लगा दी है।

भाजपा का मैनेजमेंट गणित क्या बताता है?
अध्यक्ष और मेयर के 301 घोषित नतीजों में भाजपा के 197 पद हासिल करने का आंकड़ा उसके पार्षद चुनाव के प्रदर्शन से काफी आगे है। यानी कई निकायों में भाजपा ने बहुमत नहीं होने के बावजूद जरूरी समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाया। इस चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका भी अहम रही। 2,273 निर्दलीय पार्षदों का जीतना इस बात का संकेत है कि कई निकायों में बोर्ड बनाने के लिए दलों को निर्दलीयों का समर्थन जुटाना पड़ा।




बहुमत से दूर होने के बावजूद भाजपा ने जहां बोर्ड बनाया

  • पिलानी नगरपालिका, झुंझुनूं: 35 वार्डों में भाजपा को 3 और निर्दलीयों को 30 सीटें मिलीं।
  • भरतपुर नगर निगम: 65 वार्डों में भाजपा को 20 और निर्दलीयों को 36 सीटें मिलीं।
  • हिंडौनसिटी नगर परिषद, करौली: 60 वार्डों में भाजपा को 12 और निर्दलीयों को 39 सीटें मिलीं।
  • राजगढ़ नगरपालिका, अलवर: 40 वार्डों में भाजपा को 6 और निर्दलीयों को 31 सीटें मिलीं।
  • विद्याविहार नगरपालिका, झुंझुनूं: 25 वार्डों में भाजपा को 4 और निर्दलीयों को 21 सीटें मिलीं।
  • सुरोठ नगरपालिका, करौली: 20 वार्डों में भाजपा को 2 और निर्दलीयों को 16 सीटें मिलीं।
  • नोहर नगरपालिका, हनुमानगढ़: 40 वार्डों में भाजपा को 2 और कांग्रेस को 20 सीटें मिलीं।
  • अजमेर नगर निगम: 80 वार्डों में भाजपा को 32 और कांग्रेस को 37 सीटें मिलीं।
  • पाली नगर निगम: 65 वार्डों में भाजपा को 21 और कांग्रेस को 29 सीटें मिलीं।
  • बहरोड़ नगर परिषद: 55 वार्डों में भाजपा को 20 और निर्दलीयों को 29 सीटें मिलीं।
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इन उदाहरणों से यह जरूर दिखता है कि वार्ड चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतना और अध्यक्ष या मेयर की कुर्सी हासिल करना दो अलग-अलग राजनीतिक गणित हैं। निकाय चुनाव में दलों के बीच समर्थन जुटाने, निर्दलीयों को साथ लाने और मतदान के दिन तक पार्षदों को सुरक्षित रखने की रणनीति ने कई जगह अंतिम नतीजे बदल दिए।

इस पूरी तस्वीर में अदालत की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। जहां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवाद तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप तक पहुंचे, वहां अदालत ने अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी पर रोक, मतदान के अधिकार की सुरक्षा और पार्षदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने जैसे आदेश दिए। इससे कई निकायों में चुनावी मुकाबले का अंतिम गणित प्रभावित हुआ।

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