प्राइवेट बस यूनियन ने सौंपा ज्ञापन
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नागौर में भी असर: मांगें न मानीं तो चक्का जाम की दी चेतावनी
नागौर जिले में प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने सरकार के खिलाफ आक्रोश की आग भड़का दी है। नागौर प्राइवेट बस ऑपरेटर एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों ऑपरेटरों ने धरना देकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के सचिव लिखमाराम भांभू ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, हमें सुविधाएं पाकिस्तान-अफगानिस्तान की तर्ज पर मिल रही हैं, जबकि वसूली विकसित अमेरिका जैसे देशों की तर्ज पर हो रही है।
भांभू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के 'डिजिटल इंडिया' के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तावेजों को मान्य करने की घोषणा के बाद भी बस ऑपरेटरों से मूल कागजात मांगे जाते हैं और अनावश्यक रूप से चालान काटे जाते हैं। चुनावी समय में ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के दावे के बावजूद बसों को बार-बार रोका जा रहा है, जिससे ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
यह मुख्य सात सूत्रीय मांगे
किराया निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन।
राजस्थान रोडवेज और प्राइवेट बसों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
रैली, चुनावी कार्यक्रमों या अन्य सरकारी आयोजनों में बसों का जबरन अधिग्रहण बंद हो।
कैरियर परमिशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
एसआरटी (स्पेशल रोड टैक्स) की अनुचित मांगों पर रोक लगे।
अनावश्यक चालान और मूल कागजात की मांग बंद हो।
डिजिटल इंडिया के अनुरूप पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया लागू हो।
ऑपरेटरों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती तो वे मजबूरन चक्का जाम करने को बाध्य होंगे। साथ ही, आगामी दिनों में अजमेर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान बसों को पूर्ण रूप से बंद रखने का एलान किया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को प्रभावित होने की आशंका है।