राजस्थान में सीमा पार से लगातार बढ़ते जा रहे ड्रग्स तस्करी के मामलों के नेटवर्क को टारगेट करने के लिए अब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और राजस्थान पुलिस जयपुर में ज्वाइंट इंटरोगेशन सेंटर्स बनाएगी। यह फैसला शुक्रवार को सचिवालय में हुई एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स की बैठक में लिया गया।
पंजाब के बाद अब राजस्थान ड्रग तस्करों के लिए बड़ा ठिकाना बनता जा रहा है। बीते तीन महीनों में ही राजस्थान में करीब 180 करोड़ रुपए से ज्यादा ड्रग्स की खेप पकड़ी जा चुकी है। इसी के चलते अब गृह मंत्रालय ने ड्रग्स की तस्करी और इसके नेटवर्क को क्रेक करने के लिए प्रदेश में कई स्तरों पर काम करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सबसे पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और राजस्थान पुलिस जयपुर में ज्वाइंट इंटरोगेशन सेंटर्स बनाए जाएंगे।
इसके अलावा फार्मा ड्रग कंपनियों से दवा विक्रेताओं तक आने वाली ऐसी दवाएं जो बिना डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन के नहीं दी जा सकती उन्हें ट्रेक करने के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाया जाएगा। देखने में आया है कि एच श्रेणी की इन दवाओं का नशे के लिए भी इस्तेमाल होता है, इसलिए इनकी बिक्री को पूरी तरह से निगरानी में लिया जाएगा।
इतना ही नहीं नशे के खिलाफ जागरूकता को लेकर स्कूल, कॉलेजों में भी अभियान चलाया जाएगा और छात्रों को ई- प्रतिज्ञा दिलवाई जाएगी। स्कूल-कॉलेज और शिक्षण संस्थाओं के आसपास औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे। नशे की लत के आधार पर राजस्थान को चार जोन में बांटा जाएगा। कुछ जिले ऐसे हैं, जहां नशे का कारोबार बहुत ज्यादा और तेजी से फैल रहा है, इनमें पंजाब और पाकिस्तान की सीमा से सटा गंगानगर जिला शामिल है।
गृह विभाग के अतिरक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार का कहना है कि एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स की मीटिंग में कई निर्णय लिए गए हैं। इनमें ज्वाइंट इंटरोगेशन सेंटर से लेकर जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाए जाना शामिल हैं।