उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान रीट परीक्षा के लेवल 1 पेपर के आउट होने की सूचना पुलिस को मिली। उस समय भी पुलिस ने कहा था कि पेपर महज कुछ लोगों तक ही पहुंचा है परन्तु सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की दृष्टि से पेपर रद्द किया गया एवं पद बढ़ाकर नई भर्ती निकाली गई। इस भर्ती को समय पर पूरा कर करीब 50,000 अध्यापकों को नियुक्ति दी गई थी। यदि सब-इंस्पेक्टर परीक्षा में वास्तव में कोई गड़बड़ी है तो सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए इसे रद्द करना चाहिए।
जूली ने कहा कि ऐसा लगता है लोकसभा चुनाव से पहले केवल माहौल बनाने के लिए सब-इंस्पेक्टर पेपर लीक का हो-हल्ला भाजपा ने मचाया और अब अदालत में माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा पूछे जाने के बावजूद सरकार किसी भी सख्त कार्रवाई की बजाय बहानेबाजी कर रही है। मंत्री किरोड़ीलाल मीणा कह रहे हैं कि मंत्रमंडलीय समिति द्वारा भी भर्ती रद्द करने की सिफारिश की गई है परन्तु मुख्यमंत्री इस पर फैसला नहीं कर रहे हैं। यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो युवा इस भर्ती को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें भी जेल में बन्द कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस सरकार को बताना चाहिए कि यदि पेपर लीक हुआ है तो पेपर को रद्द करने में क्या आपत्ति है? इस पेपर लीक के मुख्य आरोपी पूर्व RPSC सदस्य की नियुक्ति भी भाजपा सरकार के समय ही हुई थी। इसलिए यह भी संभव है कि इस जांच में कुछ ना कुछ ऐसे तथ्य आए हों, जिससे सरकार और भाजपा असहज है और उन्हें जनता के सामने रखना नहीं चाहती। युवाओं के साथ न्याय के लिए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वो इस परीक्षा को रद्द करेगी या इस पर केवल राजनीति ही करेगी।