झालावाड़ जिले के पिपलोदी स्कूल हादसे में सात मासूम बच्चों की मौत के बाद शुरू हुआ सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद नरेश मीणा शुक्रवार को जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर धरना देने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा भी मौजूद रहे। हालांकि शहीद स्मारक पर ताला जड़ा मिला और प्रशासन ने धरने की अनुमति नहीं दी।
राजेंद्र गुढ़ा का तीखा हमला
अमर उजाला से खास बातचीत में राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि पिपलोदी हादसे में मासूम बच्चों की मौत के बाद सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील रहा है। आदिवासी परिवारों को मुआवजे के नाम पर केवल पांच बकरियां दी गईं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आदिवासियों की किस्मत में सिर्फ पांच बकरियां ही लिखी हैं?
गुढ़ा ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब युवा जाग चुके हैं, 17 से 27 वर्ष का नौजवान परेशान और आक्रोशित है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जैसे नेपाल में नेताओं और मंत्रियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया, वैसा ही भारत में भी हो सकता है।
नरेश मीणा का संघर्ष जारी
धरने के दौरान नरेश मीणा ने कहा कि वह पिपलोदी के बच्चों की आवाज उठाने जयपुर आए हैं। उन्हें बताया गया कि शहीद स्मारक पर परमिशन नहीं है, इस पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी जहां प्रशासन चाहे उन्हें धरने की अनुमति दे सकता है, लेकिन इसके बजाय स्मारक पर ताला लगा दिया गया।
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मीणा ने साफ किया कि यह लड़ाई केवल पिपलोदी के बच्चों के लिए नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को लगता है कि उनके इलाके में भी पुलिस, स्कूल या बिजली विभाग में भ्रष्टाचार हो रहा है, वे इस लड़ाई का हिस्सा बन सकते हैं।
आमरण अनशन का एलान जल्द
नरेश मीणा ने एलान किया कि वह जल्द ही आमरण अनशन की घोषणा करेंगे और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने राजेंद्र गुढ़ा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पड़ोसी देश नेपाल में जो कुछ हुआ, वह भारत में भी संभव है।
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