आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़
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आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को उनके सोशल मीडिया दिवस पर आयोजित किए गए कार्यक्रम को लेकर पत्र लिखा है। राठौड़ ने देवनानी पर तंज कसते हुए लिखा कि एक तरफ आप सोशल मीडिया दिवस मनाने के नाम पर इन्फ्लूएंसर मीट आयोजित कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विधानसभा में कैमरे और अन्य उपकरणों पर प्रतिबंध लगाकर इन्फ्लुएंसर्स की अभिव्यक्ति पर रोक लगाई है।
राठौड़ ने लिखा कि यह जानकर अच्छा लगा कि विश्व सोशल मीडिया दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ हुई हमारी सकारात्मक और रचनात्मक मीटिंग के बाद आपने भी इन्फ्लूएंसर मीट का आयोजन किया लेकिन खेद की बात यह है कि आपने इस संवाद को भी भारतीय जनता पार्टी की संकीर्ण सोच और नियंत्रक प्रवृत्ति के अनुरूप सीमित कर दिया, जिसमें कैमरे और अन्य उपकरणों पर प्रतिबंध लगाकर इन्फ्लुएंसर्स की अभिव्यक्ति के सबसे प्रभावी माध्यम पर ही रोक लगा दी गई।
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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वे स्वत्रंत स्वर हैं, जो बिना किसी संस्था, संपादकीय नियंत्रण या राजनीतिक दबाव के समाज की नब्ज पर संवाद करते हैं। यही स्वतंत्रता और निर्भीकता लोकतंत्र की असली पहचान है। जब आप इन्फ्लुएंसर्स की इस स्वतंत्र अभिव्यक्ति को बाधित करते हैं तो यह केवल अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला नहीं होता, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा पर भी प्रहार होता है।
आप कहते हैं कि संविधान खतरे में नहीं है, संविधान से कोई छेड़छाड़ नहीं हो रही तो फिर आज सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ रही है? हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के विधायक कंवरलाल मीणा के प्रकरण में आपका आचरण पूरे देश ने देखा। संविधान की अवहेलना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने की आपकी कोशिश स्पष्ट थी लेकिन अंततः माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आपको मीणा की सदस्यता रद्द करनी पड़ी। यह घटना दर्शाती है कि संविधान की रक्षा के नाम पर केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आचरण से सच्चाई सामने आती है।
भाजपा पहले ही मुख्यधारा मीडिया पर प्रभाव और नियंत्रण करने का प्रयास करती रही है और अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की आवाज को भी सीमित करने का प्रयास कर रही है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध स्वतंत्र अभिव्यक्ति की भावना का अपमान है।