सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग में कथित करोड़ों रुपये के घोटालों की जांच में ढिलाई पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को 5 फरवरी को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने डॉ. टी.एन. शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। न्यायालय ने बताया कि 6 सितंबर 2024 को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में पिछले पांच वर्षों के टेंडरों की जांच के निर्देश दिए गए थे। साथ ही याचिकाकर्ता को एसीबी के समक्ष अभ्यावेदन देने की अनुमति दी गई थी। इसके तहत याचिकाकर्ता ने 27 मामलों से जुड़े दस्तावेजी सबूत एसीबी को सौंपे थे।
हालांकि न्यायालय ने कहा कि आदेश के करीब डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद एसीबी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। केवल प्रद्युमन दीक्षित से जुड़े एक मामले में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एसीबी के अतिरिक्त एसपी और डीएसपी से पूछा कि डेढ़ साल में क्या कार्रवाई की गई है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि मामले में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने न्यायालय को अवगत कराया कि एसआईटी गठन के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए SIT के प्रमुख डीआईजी आनंद शर्मा को 5 फरवरी को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
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अधिवक्ता भंडारी ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत कई मामले केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें गंभीर फर्जीवाड़े भी शामिल हैं। कुछ मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और करोड़ों रुपये का भुगतान उठाया गया। एक मामले में तो कार्य आदेशों में काट-छांट कर उन्हें दो वर्षों तक बढ़ाया जाता रहा, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये से जुड़े अन्य घोटालों पर भी कोई कदम नहीं उठाया गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजनेट परियोजना में जहां 17,500 डिवाइस लगाए जाने थे, वहां तीन वर्षों में केवल 1,750 डिवाइस ही लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और आगामी सुनवाई में डीआईजी से स्पष्ट जवाब देने को कहा है।