कांग्रेस मेवाड़ और वागड़ में अपने छिटके हुए आदिवासी वोट बैंक को फिर से साधने में जुट गई है। इन दोनों अंचलों में कुल 28 विधानसभा सीटें आती हैं लेकिन वागड़ में कांग्रेस के सबसे तेज-तर्रार नेता महेंद्रजीत मालवीय ने लोकसभा चुनावों में बीजेपी का दामन थाम लिया था तो दूसरी तरफ भारत आदिवासी पार्टी ने कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी कर दी।
अब कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर वागड़ और मेवाड़ में मिशन मोड पर काम करने के लिए जुट गई है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली उदयपुर के दौरे पर पहुंचे हैं। कांग्रेस मेवाड़ और वागड़ को साधने के लिए आज से कार्यकर्ता सम्मेलनों की शुरुआत करेगी। इसके साथ ही आदिवासियों के घरों पर रात्रि विश्राम करने औऱ उनके साथ भोजन करने जैसे मूवमेंट भी शुरू किए जाएंगे।
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बीएपी के बढ़ते जनाधार के चलते कांग्रेस के लिए वागड़ और उदयपुर अंचल में सियासी चुनौतियां अब काफी बढ़ चुकी हैं। आदिवासी वोट बैंक छिटकने के चलते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की परफॉर्मेंस काफी कमजोर रही। वागड़ में बाप का जनाधार कितनी तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2018 में बाप के पास मात्र एक विधायक था और 2023 में यहां इसके विधायकों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा कांग्रेस ने ही उठाया है।
कांग्रेस अब आदिवासियों के मुद्दे प्रमुखता से सदन से लेकर सड़क तक उठाएगी। जल, जंगल, जमीन, गरीबी, मूलभूत समस्याएं, रोजगार और उद्योग से जुड़े हर मुद्दे पर कांग्रेस आवाज उठाएगी और आदिवासियों के घरों पर रात्रि विश्राम कर उनके हितैषी होने का देगी। लंबे समय से पार्टी ने महेंद्रजीत मालवीय को ही इस अंचल में सारी ताकत दे रखी थी। उनके अलावा कांग्रेस में ऐसी सेकंड लीडरशिप नहीं थी जो आदिवासियों को प्रभावित कर सकती थी। कांग्रेस ने यहां अपनी नई लीडरशिप को भी तैयार करने की रणनीति बनाई है, जिसके तहत युवा नेता और विधायक गणेश घोघरा को पिछले दिनों आदिवासी कांग्रेस की कमान दी गई है। वहीं पार्टी के पास यहां दयाराम परमार,अर्जुन बामनिया, नानालाल निनामा और रमिला खड़िया जैसे बड़े चेहरे हैं।