राजस्थान में विधानसभा उपचुनावों के नतीजों के मायने जीत-हार के आगे भी हैं। कांग्रेस ने लोकसभा में 11 सीटें जीतकर जो एडवांटेज लिया था, उसे उपचुनाव में गंवा दिया। उपचुनावों के नतीजों का आकलन करें तो नतीजे बीजेपी की जीत कम और कांग्रेस की हार ज्यादा रहे। इसकी सबसे बड़ी वजह थी खेमाबंदी।
सलूंबर में रघुवीर मीणा कांग्रेस को ले डूबे, झुंझुनू में अध्यक्ष सहित कांग्रेस का कोई नेता प्रचार के लिए नहीं बुलाया गया। नेता प्रतिपक्ष जूली अलवर से बाहर नहीं निकले। अशोक गहलोत और सचिन पायलट महाराष्ट्र चले गए। पायलट ने कैंपेनिंग की लेकिन सिर्फ दौसा और देवली-उनियारा आकर चले गए। सांसद हरीश मीणा ने देवली में प्रचार ही नहीं किया। ऐसे में कांग्रेस सिर्फ दौसा सीट जीत पाई, वह भी भाजपा के भितरघात के कारण।
खेमाबंदी की लड़ाई और एक-दूसरे को निपटाने की जिद में कांग्रेस 4 सीटों पर जमानत जब्त करवा बैठी और आलाकमान के पास मैसेज यह गया कि राजस्थान में कांग्रेस बुरी तरह बिखरी हुई है। इसे एकजुट रखने के लिए बड़े कद के नेता की जरूरत है।
हनुमान को हटाने की जिद में खुद निपट गए
खींवसर में हनुमान बेनीवाल को निपटाने की हताशा में कांग्रेस खुद बुरी तरह से निपट गई। जो नागौर कांग्रेस का गढ़ रहा है, वहां कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस प्रत्याशी रतन चौधरी को यहां मात्र 5 हजार वोट मिले। इधर कांग्रेस और हनुमान की लड़ाई का फायदा बीजेपी को मिल गया।
भंवर और जुबेर की अदावत में गई रामगढ़ सीट
रामगढ़ में जुबेर परिवार और कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र की अदावत किसी से छुपी नहीं है। जुबेर खान के निधन के बाद रामगढ़ सीट पर उपचुनाव में उनके बेटे आर्यन जुबेर कांग्रेस के टिकट पर लड़े लेकिन जो एससी वोट कांग्रेस का माना जाता है, रामगढ़ में वह बड़ी तादाद में बीजेपी में शिफ्ट हुआ।
बीजेपी में भितरघात की वजह से जीता दौसा
दौसा में कांग्रेस जीती जरूर लेकिन यहां बीजेपी अपने भितरघात की वजह से चुनाव हारी। बीजेपी के मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने इसे लेकर बयान भी दिया कि मुझे अपनों ने ही हरा दिया। कांग्रेस की तरफ से तो दौसा सांसद मुरारी मीणा चुनाव प्रचार में भी नजर नहीं आए।
देवली में हरीश ने केसी को अकेला छोड़ा
देवली-उनियारा में यही स्थिति रही। कांग्रेस सांसद हरीश मीणा उपचुनाव में पूरी तरह नदारद रहे। कांग्रेस के प्रत्याशी हर सीट पर अकेला ही जूझता नजर आ रहा था, जबकि बीजेपी ने अपनी पूरी चुनावी मशीनरी को मैदान में झोंक रखा था। यही वजह रही कि जो सीट विधानसभा में कांग्रेस के पास थी, उस पर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर चला गया।
सलूंबर में बगावत ले डूबी
सलूंबर में पूर्व सांसद रघुवीर मीणा की बगावत कांग्रेस को ले डूबी। कांग्रेस के वोट यहां बीएपी में शिफ्ट हो गए। वहीं
चौरासी में तो कांग्रेस चुनाव छोड़कर ही बैठ गई थी। साल 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस यहां दूसरे नंबर की पार्टी थी। इस बार उपचुनावों में वह तीसरे नंबर पर चली गई।