मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान में अफसरों के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए 9 थानेदारों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने तथा भूमि आवंटन के मामले में आईएएस और आरएएस के खिलाफ भी सेवा नियमों के तहत कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने राज्य सेवा के अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, अभियोजन स्वीकृति और 17-ए के विचाराधीन 37 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए 55 अधिकारियों के जांच प्रकरणों में कार्रवाई की है।
9 थानेदारों को उनकी कार्यशैली, कार्य-दक्षता, सत्यनिष्ठा, विभागीय जांच कार्रवाई और कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन आदि की विभिन्न स्तर पर स्क्रीनिंग करते हुए उच्च स्तरीय समिति से परीक्षण करवाकर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई की है। वहीं नियम विरूद्ध भू-आवंटन के एक गंभीर प्रकरण में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969, के नियम 8 के तहत कार्रवाई प्रारम्भ किए जाने का अनुमोदन किया है।
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उन्होंने लंबित प्रकरणों का निस्तारण करते हुए 6 अधिकारियों के विरूद्ध अभियोजन चलाने की मंजूरी तथा राजस्थान प्रशासनिक एवं लेखा सेवा के 2 अधिकारियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 17-ए में विस्तृत जांच एवं अनुसंधान करने की अनुमति भी प्रदान की। वहीं सेवारत 13 अधिकारियों के विरूद्ध सीसीए नियम-16 के तहत विभागीय जांच कार्रवाई में वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी/असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया है। उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारियों के पुराने प्रकरणों का निस्तारण करते हुए पेंशन नियमों के तहत पांच अधिकारियों की पेंशन रोके जाने का निर्णय किया। इनमें से एक अधिकारी के विरूद्ध भ्रष्टाचार प्रकरण में दोष सिद्धि होने से शत प्रतिशत पेंशन रोकने की सख्त शास्ति अधिरोपित की गई है।
साथ ही सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरूद्ध संचालित 9 प्रकरणों में 14 अधिकारियों पर प्रमाणित आरोपों के जांच निष्कर्ष का अनुमोदन भी किया। सीसीए नियम-34 के तहत एक अधिकारी द्वारा प्रस्तुत पुनर्विलोकन याचिका को निरस्त करते हुए दण्ड को यथावत रखा तथा सेवारत अधिकारियों के 3 प्रकरणों में सीसीए नियम-23 के तहत अपील स्वीकार करने एवं 2 अधिकारियों के विरूद्ध अपील आंशिक स्वीकार करने का निर्णय लिया।