भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने अपने ताजा बयान से प्रदेश की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने भाजपा संगठन और मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- सत्ता और संगठन में बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया है।
अग्रवाल ने कहा, "पुराने पेड़ और सूखे पेड़ गिरेंगे, नए पत्ते उभरेंगे।" उन्होंने इसे नई टीम के गठन और संगठन में नए कार्यकर्ताओं के आगमन का संकेत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल और संगठन में पुराने और नए लोगों का संगम होगा। मंत्रिमंडल में वर्तमान में सभी सदस्य अनुभवी हैं लेकिन इसकी भी एक सीमा है। समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है।
प्रदेश में नए जिलों और संभागों को खत्म करने के फैसले पर उन्होंने भाजपा सरकार का बचाव करते हुए कहा कि यह निर्णय सोच-समझकर लिया गया है। अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री को राजस्थान की वित्तीय स्थिति का भलीभांति आभास था। पूर्ववर्ती सरकार ने वित्तीय हालात को नजरअंदाज करते हुए नए जिले बनाए थे, ऐसे जिलों को खत्म करना आवश्यक था।
जहां विरोध हो रहा है, वहां के लोग पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा बनाए गए जिलों के खत्म होने से नाराज हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के जिले को खत्म करने पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के होते हैं, न कि केवल किसी एक जिले के। कांग्रेस उन्हें सिर्फ जिले तक सीमित रखना चाहती है।
संगठन के भीतर किसी प्रकार की असंतुष्टि की बात को खारिज करते हुए उन्होंने कहा- भाजपा में किसी तरह की नाराजगी नहीं है। पार्टी में सभी मिलकर काम कर रहे हैं। सत्ता और संगठन में सामंजस्य है। अग्रवाल के बयान को भाजपा संगठन में संभावित बदलाव और पार्टी में नए नेतृत्व को बढ़ावा देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके बयान ने प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।