राजस्थान में 3,362 एमओयू पर 7.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश कार्य शुरू हो गए हैं। ऊर्जा, उद्योग, पर्यटन और कृषि सहित 20 सेक्टरों में प्रोजेक्ट्स प्रगति पर हैं। निवेश को गति देने के लिए सरकार 12 नई नीतियाँ ला रही है, जिनमें एग्री, आईटी, सेमीकंडक्टर व स्पोर्ट्स नीति शामिल हैं।
राजस्थान में निवेश परिदृश्य अब इरादों से हकीकत की ओर बढ़ रहा है। अब तक हुए 3,362 एमओयू पर ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है, जिनमें 7.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। ये निवेश राज्य के 20 प्रमुख सेक्टरों में किए जा रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र निवेश में सबसे आगे है, जिसमें 432 एमओयू के माध्यम से 5.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े बड़े उपक्रम शामिल हैं, जो राजस्थान को देश का अग्रणी क्लीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में हैं।
सेक्टर वाइज निवेश का ब्योरा:
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह राजस्थान की आर्थिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। राज्य ने निवेश घोषणाओं और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच की खाई को पाट दिया है।
12 नई नीतियां लाने की तैयारी
निवेश प्रस्तावों को रफ्तार देने के लिए सरकार इसी साल 12 नई नीतियां भी लाने की तैयारी कर चुकी है। इनमें से कुछ नीतियों के ड्रॉफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं। आने वाली नई नीतियां इस प्रकार हैं:
1. एग्रीकल्चर एवं फूड प्रोसेसिंग: किसानों की आय बढ़ाने और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देने पर जोर।
2. नई औद्योगिक नीति: मैन्युफैक्चरिंग को सशक्त बनाकर बड़े निवेश को आकर्षित करने की योजना।
3. एविएशन और लगिंग: राजस्थान को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस का हब बनाना, ड्रोन्स और स्पेयर पार्ट्स के लिए तैयार करेंगी नीति।
4. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए राजस्थान को नया ग्लोबल हब बनाना। मल्टीनैशनल कंपनियों के आने से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सपोर्ट सेंटर खुल सकेंगे।