राजस्थान की राजधानी जयपुर में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी को लेकर छत से गिरने, मांझे से कटने और सड़क हादसे के दौरान 45 से ज्यादा मामले रिपोर्ट हुए हैं। इनमें 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें सवाई मान सिंह अस्पताल के पॉलीट्रोमा वार्ड में भर्ती करवाया गया है। वहीं, 11 लोग ऐसे हैं, जिनके मांझे से चेहरे, हाथ और गले कट गए।
डॉक्टर के मुताबिक, करीब 10 गंभीर घायलों को पॉलीट्रोमा वार्ड में भर्ती किया है। ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज और ऑर्थोपीडिक्स डिपॉर्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनुराग धाकड़ ने बताया, हॉस्पिटल में 13 से 15 जनवरी तक के लिए इमरजेंसी में विशेष व्यवस्था की गई है। इसमें ऑर्थोपीडिक्स, न्यूरो सर्जरी के अलावा एनीस्थिसिया, जनरल सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और ईएनटी के डॉक्टर्स की भी ड्यूटी लगाई है।
डॉ. धाकड़ ने बताया कि 13 जनवरी से आज शाम पांच बजे तक कुल 49 मरीज ट्रॉमा सेंटर में अब तक आ चुके हैं। जो पतंगाबाजी के दौरान घायल हुए हैं। इसमें से 10 मरीजों के सिर में चोट लगी है, जबकि 11 मरीज मांझे से कटने के बाद उपचार के लिए यहां पहुंचे। उन्होंने बताया, गंभीर घायल करीब 10 मरीजों को पॉलीट्रोमा वार्ड में भर्ती किया है, जबकि शेष को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी है।
डॉ. धाकड़ ने बताया, मकर संक्रांति पर तीन दिन (13 से 15 जनवरी तक) ज्यादातर केस मांझे से कटने के आते हैं। इसमें गर्दन, नाक के कटने के अलावा हाथ और चेहरे पर मांझे से गंभीर रूप से कटने के केस आने की स्थिति को देखते हुए ईएनटी और जनरल सर्जरी के डॉक्टर्स की विशेष ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अलावा पतंगबाजी के दौरान छत से गिरने अथवा पतंग लूटते समय दुघर्टना में घायल होने के भी कुछ केस आते हैं। इसे देखते हुए न्यूरो सर्जरी और ऑर्थोपीडिक्स के डॉक्टर्स भी राउड दी क्लॉक ड्यूटी पर रहते हैं।