राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े गंभीर मामलों के साथ-साथ अपने बयानों को लेकर भी लगातार चर्चा और विवादों में बने हुए हैं। कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत तथा किडनी फेल होने के मामलों के बीच मंत्री की कुछ टिप्पणियां राजनीतिक बहस का विषय बन गईं।
'नाचती हुई आई थीं या बीमार होकर?'
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल होने के मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों का बचाव करते हुए कहा- "सभी की तबीयत पहले से सही नहीं थी। आप ही बताइए कैसी हालत में आई थी, पैदल चलकर नाचती आई थीं या बीमार होकर आई थीं।"
जब मीडिया ने इस बयान पर आपत्ति जताई तो मंत्री ने कहा- "हम इतने लोगों की जान बचाते हैं, तब आप नहीं कहते। आप मोर्टेलिटी की बात कर रहे हैं। 1000 पेशेंट आते हैं, उनमें से 2 की डेथ हो जाती है, बाकी दुरुस्त होकर जाते हैं, वो आप नहीं बोल रहे हो।"
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर भी घिरे
इससे पहले कोटा में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल होने के मामलों के दौरान खींवसर का ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर दिया गया बयान भी सुर्खियों में रहा। मंत्री ने कहा था-
"ऑक्सीटोसिन के अंदर सिर्फ पानी भरा था... ये अनियमितता हमने पाई। हम उनको 20-25 प्रतिशत छूट देते हैं कि आपके पास ड्रग्स नहीं है तो लोकल से ले सकते हो। लोकल परचेज किया गया था। उसके अंदर दवाई की कोई भी मात्रा नहीं थी।"
उन्होंने कहा था- "जब डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया, वो इंजेक्शन पोस्ट डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग रोकता है। जब इंजेक्शन दिया और उसके अंदर ड्रग ही नहीं थी और खाली पानी गया तो एक्सेसिव ब्लीडिंग तो जरूर होगी।"
हालांकि बाद में दवा की गुणवत्ता और जांच रिपोर्ट को लेकर कई सवाल उठे। विपक्ष ने सरकार से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की थी।
स्वास्थ्य संकट के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव
राज्य में प्रसूताओं की मौत, किडनी फेल होने के मामलों और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री के बयानों ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जवाबदेही तय करने के बजाय विवादित बयानों के कारण घिर रही है।