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राजस्थान: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्लेसमेंट एजेंसी के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी मिलेगा न्यूनतम वेतनमान

Sun, 08 Nov 2026 09:45 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केवल नियुक्ति के तरीके के आधार पर न्यूनतम वेतनमान से वंचित नहीं किया जा सकता।
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए नियुक्त होने के आधार पर कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग में कार्यरत दो कर्मचारियों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें विभाग में लागू चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 60 दिन के भीतर आवश्यक आदेश जारी करने को कहा है।

दो कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका

न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकल पीठ ने सुनील कटारा और अनिल कुमार पारगी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मामले के अनुसार, सुनील कटारा बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, अनिल कुमार पारगी बांसवाड़ा स्थित जनजाति क्षेत्रीय विकास कार्यालय में चौकीदार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। दोनों कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतनमान का लाभ नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

नियमित कर्मचारियों के समान काम, फिर भी नहीं मिल रहा था लाभ

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि वे लंबे समय से विभाग में चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न पदों पर लगातार काम कर रहे हैं। वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है। वहीं, विभाग की ओर से दलील दी गई कि दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से हुई है। वे नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक्त नहीं हुए हैं, इसलिए उन्हें न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने का अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने खारिज किया विभाग का तर्क

हाईकोर्ट ने विभाग की दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने माना कि याचिकाकर्ताओं और विभाग के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध स्थापित है और इस पर कोई विवाद नहीं है। अदालत ने इसी विभाग के एक अन्य कर्मचारी धीरिया के मामले में 8 अप्रैल 2026 को दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। उस निर्णय में समान परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा कि प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्ति का मुद्दा पहले ही विचाराधीन मामले में तय किया जा चुका है। ऐसे में केवल नियमित चयन प्रक्रिया से नियुक्त नहीं होने के आधार पर कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान के लाभ से वंचित रखना उचित नहीं है।

60 दिन में लाभ देने के लिए आदेश जारी करने होंगे

हाईकोर्ट ने दोनों कर्मचारियों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें विभाग में लागू चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिन के भीतर इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने होंगे।

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