प्रदेश के 9.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन-भत्तों में विसंगतियों का परीक्षण करने वाली खेमराज कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही बवाल शुरू हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने इस रिपोर्ट को यह कहते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है कि इसमें उनकी कोई मांग नहीं मानी गई। खास तौर पर कर्मचारियों के सबसे बड़े बाबू संवर्ग की लगभग सभी मांगों को कमेटी ने खारिज कर दिया है। ऐसे में अब विधानसभा के बजट सत्र से पहले कर्मचारी आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।
राजस्थान राज्य मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मनोज सक्सेना का कहना है कि मंत्रालयिक कर्मचारियों को ग्रेड पे और सचिवालय पेटर्न में से कुछ नहीं दिया गया। कर्मचारियों में इसे लेकर बहुत ज्यादा नाराजगी है और हम रिपोर्ट को खारिज करते हैं। जल्द ही इसमें आंदोलन शुरू करने के लिए बैठक करेंगे।
'रिपोर्ट से कर्मचारियों को फायदा नहीं'
हमारे संवर्ग में सहायक कर्मचारी से लेकर राजपत्रित भी आते हैं। सरकार ने जो रिपोर्ट दी है, उसमें ऐसा कुछ लगता नहीं कि कुछ आगे का फायदा होगा। इसके लिए अब एक-दो दिन बैठकर बातचीत करेंगे।
गजेंद्र सिंह राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत
'वेतन विसंगती की रिपोर्ट खारिज करते हैं'
15 साल से डिमांड कर रहे हैं, सबसे पहले जिस संगठन को बुलाया उसकी एक भी बात नहीं मानी।
रमन पारीक, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान निजी सहायक संवर्ग महासंघ
कमेटी ने कहा- एंट्री लेवल पर वेतन बढ़ाया तो सबका बढ़ाना पड़ेगा, इसलिए मांग खारिज
समिति प्रवेश पद अर्थात जूनियर असिस्टेंट के वेतन स्तर में सुधार की अनुशंसा करने पर विचार नहीं करती है। यदि प्रवेश पद (जूनियर असिस्टेंट) के वेतन स्तर में सुधार किया जाता है, तो सभी पदोन्नति पदों के वेतन स्तर में सुधार की आवश्यकता होगी। इसलिए, समिति मंत्रालयिक संवर्ग के वेतन स्तर में संशोधन की अनुशंसा करने के लिए इच्छुक नहीं है।