विधानसभा में सोमवार को सरकारी मुख्य सचेतक ने आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग पर सदन में गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश कर दिया। इसके बाद स्पीकर ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर उसे विशेषाधिकार हनन समिति को रैफर कर दिया। गर्ग ने इस प्रस्ताव को रखते हुए कहा था कि गर्ग ने सदन में झूठ बोला है कि लोहागढ़ फोर्ट में लोगों को धमकाया जा रहा है और प्रशासन की तरफ से वहां रहने वाले लोगों को अतिक्रमी बताकर नोटिस दिए जा रहे हैं, जबकि प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया गया। फोर्ट के बाहर रहने वाले 22 लोगों को ही नोटिस दिए गए हैं।
इसके बाद सुभाष गर्ग ने सदन से बाहर आकर अपने आरोपों के संबंध में तथ्य पेश करते हुए नोटिस की कॉपी दिखाई। इसके साथ ही उन्होंने कुछ वीडियो फुटेज भी सार्वजनिक किए, जिसमें लोहागढ़ फोर्ट में रहने वाले लोग प्रशासन पर इस तरह के आरोप लगा रहे हैं।
इतिहास में पहली बार स्थगन प्रस्ताव पर नोटिस
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी मीडिया से बात करते हुए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की निंदा की। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर आज एक और काला अध्याय जुड़ गया है। जूली बोले कि ऐसा विधानसभा के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव को लेकर किसी विधायक के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया हो। जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस चीज को संज्ञान में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तानाशाही की हद है। इसका मतलब आपके खिलाफ मीडिया बोलता है तो उसे बंद कर दो और विधायक बोलता है तो उसके खिलाफ विशेषाधिकार का नोटिस दे दो।
केंद्र में एनडीए का हिस्सा है आरएलडी
खास बात यह है कि बीजेपी ने यह विशेषाधिकार का नोटिस अपने घटक दल के विधायक को ही दिया है। आरएलडी केंद्र में एनडीए सरकार का हिस्सा है।